Monthly Archives: May 2015

  • सिलसिला

    सिलसिला

    तुम्हारी लबों से आई आवाज़ों में मगरूर होता गया। जब – जब अदाओं को देखा तो सुरूर चढता गया। मुलाकातों का सिलसिला जैसे-जैसे आगे बढता गया हम तुम्हारी तरफ़ इस कदर खिचा हुआ चला आया हर...





  • कविता

    कविता

    काले दिनों में तुमने आँखें खोली हैं मेरे बच्चे अब तो बस तू नज्मों में ही पढ़ेगा स्वर्ग से सुंदर धरती की बातें सच तो यही है कि तेरी जाई ने भी कई दिनों से नहीं...