कविता

देखो,बरस रहा है पानी…

बादलों से आता
पेड़ों को गुदगुदाता
प्रेम गीत गाता
देखो,सुबह से बरस रहा है पानी ।
फुहारी साड़ी ले आता
पलकों से सहलाता
सोई हसरतें जागता
उदास मौसम को भगाता
देखो, बिन थके लरज़ रहा है पानी।
झरोखों में मुस्काता
याद पी की दिलाता
नेह चिठिया सुनाता
हृदय लहक-लहक जाता
देखो,नवेली दुल्हन सा ठुमक रहा है पानी ।
संग पुरवा के मचलता
झट अलकों पर पसरता
मन फूल सा महकता
टिप-टिप आँगन बरसता
देखो,नरम झोंकों पर फिसल रहा है पानी ।

— कल्पना मिश्रा बाजपेई

परिचय - कल्पना मनोरमा बाजपेई

जन्म तिथि 4/6/1972 जन्म स्थान – औरैया, इटावा माता का नाम- स्व- श्रीमती मनोरमा मिश्रा पिता का नाम- श्री प्रकाश नारायण मिश्रा शिक्षा - एम.ए (हिन्दी) बी.एड कर्म क्षेत्र - अध्यापिका प्रकाशित कृतियाँ – सारंस समय का साझा संकलन,जीवंत हस्ताक्षर साझा संकलन, कानपुर हिंदुस्तान,निर्झर टाइम्स अखबार में,इंडियन हेल्प लाइन पत्रिका में लेख,अभिलेख, सुबोध सृजन अंतरजाल पत्रिका में। हमारी रचनाएँ पढ़ सकते हो । लेखन - स्वतंत्र लेखन संप्रति - इंटर कॉलेज में अध्यापन कार्य । सम्मान - मुक्तक मंच द्वारा (सम्मान गौरव दो बार )भाषा सहोदरी द्वारा (सहोदरी साहित्य ज्ञान सम्मान) साहित्य सृजन - अनेक कवितायें तुकांत एवं अतुकांत,गजल गीत ,नवगीत ,लेख और आलेख,कहानी ,लघु कथा इत्यादि ।

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