कविता

“मत ठुकराओ सनम”

बोलो सजन मंजूर है क्या तनिक बताओ कसूर है क्या छाई रहूँ कि परछाई रहूँ तेरे नैनों में मेरा गुरुर है क्या || नजरों में तेरा ही श्रृंगार करूँ हर पल तेरा ही दीदार करूँ तुं माने कहाँ तुं जाने कहाँ तुझे सपनों में पाके गुहार करूँ || तुं रूठा रहें मै मनाती   रहूँ […]

हास्य व्यंग्य

हास्य व्यंग : नारद की छुट्टी

हास्य व्यंग नारद की छुट्टी ===================== बदल गया अब जीर्ण ज़माना , नारद जी भारत आये / देखा जन -जन के हाथोंदेखा, इक छोटा सा खिलौना[मोबाईल] / कुछ देर रहे भौचक्के नारद , पागल जैसे करते बात / मोबाईल पर बोल रहे हैं ,,, न कोई दूसर प्राणी / , नारद की उत्सुकता जागी , […]

कविता

सुलगा हुआ जग लग रहा!

सुलगा हुआ जग लग रहा, ना जल रहा ना बुझ रहा; चेतन अचेतन सिल-सिला, पैदा किया यह जल-जला । तारन तरन सब ही यहाँ, संस्कार वश उद्यत जहान; विधि में रमे सिद्धि लभे, खो के भरम होते सहज । आत्मीय सब अन्तर रहे, माया बँधे लड़ते रहे; जब भेद मन के मिट गये, उर सुर […]

कविता

छलका रहा होगा झलक !

छलका रहा होगा झलक, प्रति जीव के आत्मा फलक; वह मूल से दे कर पुलक, भरता हरेक प्राणी कुहक । कुल-बिला कर तम- तमा कर, कोई हृदय में सिहा कर; सिमटा कोई है समाया, उमगा कोई है सिधाया । सुध में कोई बेसुध कोई, रुधता कोई बोधि कोई; चलते रहे चिन्ता दहे, चित शक्ति को […]

संस्मरण

मेरी कहानी – 38

दुनिआ में सब  कुछ भूल सकता है लेकिन एक ऐसी चीज़ है जो किसी को नहीं भूलती , वोह है “माँ”। भले ही आप किसी को उस का ज़िकर करें या ना लेकिन माँ की याद हमेशा दिल में होती है। मैं यह नहीं कहता कि पिता जी की याद नहीं आती लेकिन पहले माँ ही याद […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 14)

मंडलीय कार्यालय में कम्प्यूटर शिक्षा उस समय तक हमारे बैंक के सभी मंडलों में लगभग सभी विभागों में पी.सी. लगा दिये गये थे और अधिकारी तथा कुछ बाबू भी उन पर कार्य करते थे। कार्य अधिकतर एमएस-आॅफिस पैकेज पर किया जाता था, जिससे पत्र, रिपोर्ट, चार्ट आदि तैयार किये जा सकते थे। कई अधिकारियों ने […]

कविता

मेरा नाता

जिधर देखती हूँ, गम की परछाइयाँ है| ना मुहब्बत की डगर, ना प्यार की खाइयाँ है | दुःख को ही बना लिया है, हमने अपना| खुशी तो लगती है अब कोई, भयानक सपना| दुःख से ही है , अब मेरा नाता | खुशी के बदले, गम ही है भाता | दुखी मिलता है, जब कोई […]

बाल कविता

बाल कविता : लड्डू का पौधा

एक बार पार्टी थी घर में, लड्डू आए बड़े बड़े, खाते खाते दो लड्डू थाली मे से निकल पड़े, मां बोली पिंकी से बेटा, नीचे गिरा हुआ मत खाओ, चिड़िया कोई खा ले इसको , ऐसी जगह पे रख आओ, बात ये सुनकर पिंकी अपने मन ही मन मे मुस्काई, उठा के दोनो लड्डू वो […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर हमें तीन सौ वर्ष की आयु प्रदान करें

ओ३म् संसार का प्रत्येक मनुष्य चाहता है कि वह स्वस्थ हो, बलवान हो, सुखी हो व सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं व आनन्द की सामग्री से सम्पन्न हो। इसके साथ ही वह दीघार्यु भी होना चाहता है। दीघार्यु हमारे पूर्व जन्म व इस जन्म में किये गए शुभ व पुण्य कर्मो का परिणाम होती है। मनुष्य […]

कविता

==कमतर ना समझना==

विवाह बंधन तोड़ दूँ क्या अकेला तुझे छोड़ दूँ क्या ? हर महीने रख पगार हाथ मायके ओर दौड़ दूँ क्या ? स्नेह-मोहब्बत का है रिश्ता टकराहट में मोड़ दूँ क्या ? रमेश जी खूब कमाते हैं तुमको भी यह होड़ दूँ क्या ? दिल दुखा रहा बहुत मेरा ये व्रत चौथ का तोड़ दूँ […]