Monthly Archives: June 2015

  • “मत ठुकराओ सनम”

    “मत ठुकराओ सनम”

    बोलो सजन मंजूर है क्या तनिक बताओ कसूर है क्या छाई रहूँ कि परछाई रहूँ तेरे नैनों में मेरा गुरुर है क्या || नजरों में तेरा ही श्रृंगार करूँ हर पल तेरा ही दीदार करूँ तुं...






  • मेरा नाता

    मेरा नाता

    जिधर देखती हूँ, गम की परछाइयाँ है| ना मुहब्बत की डगर, ना प्यार की खाइयाँ है | दुःख को ही बना लिया है, हमने अपना| खुशी तो लगती है अब कोई, भयानक सपना| दुःख से ही...



  • ==कमतर ना समझना==

    ==कमतर ना समझना==

    विवाह बंधन तोड़ दूँ क्या अकेला तुझे छोड़ दूँ क्या ? हर महीने रख पगार हाथ मायके ओर दौड़ दूँ क्या ? स्नेह-मोहब्बत का है रिश्ता टकराहट में मोड़ दूँ क्या ? रमेश जी खूब कमाते...