गीतिका/ग़ज़ल

फूलों से खुशबू लेकर खिलने का वादा

फूलों से खुशबू लेकर खिलने का वादा। खुद से कर लो जीवन भर हँसने का वादा।   बन आँसू बोझिल हों पलकें अगर तुम्हारी बुझे पलों से करो पुलक बनने का वादा।   करना होगा अगम जलधि की जलधारा से मझधारा में कभी नहीं फँसने का वादा।   चलते-चलते पाँव फिसलने लगते हों यदि करो […]

स्वास्थ्य

पीठ दर्द का इलाज

आजकल पीठ के दर्द की शिकायत बहुत पायी जाती है। इसके कारण हो सकते हैं- व्यायाम न करना, मोटा तकिया लगाकर सोना और गलत तरीके से बैठना या चलना। हमें सभी कार्य करते समय, बैठते और चलते समय भी रीढ़ को बिल्कुल सीधी रखना चाहिए अर्थात् जमीन के लम्बवत्। सोते समय भी बिना तकिया लगाये […]

कविता

परिवार खुशियों की दुकान

परिवार खुशियों की दुकान है खुशियाँ यहाँ पर बिकती है साथ अनंत स्नेह-प्यार भी हमें मुफ्त में ही मिलती है परिवार वृक्ष समान है हर सदस्य इसके शाखा टहनी बढ़ने पर धूप नहीं बढ़ती छाया की आशा सामंजस्य बनाके सबके साथ कदम मिलाके चलना है परिवार में फूट होना भ़ईया पतन की ओर बढ़ना है […]

कविता पद्य साहित्य

अपूर्ण मकसद !

जिंदगी का मकसद क्या है ? अनादि काल से यह प्रश्न अनुत्तरित खड़ा है, उतर किसी ने न जाना न किसीने इसका उत्तर दिया l क्या खाना ,सोना और फिर मर जाना यही  जीव की नियति है ? पशु, पक्षी ,कीट, पतंग नहीं है मस्तिष्क उनका उन्नत उनमे नहीं उठते जिज्ञासा का उच्च तरंग  l […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

महर्षि दयानन्द और उनके सत्य व सर्वहितकारी मन्तव्य

ओ३म् महर्षि दयानन्द संसार में सम्भवतः ऐसे पहले धार्मिक महापुरूष हुए हैं जिन्होंने ईश्वरीय ज्ञान वेदों का प्रचार करने के साथ अपने मन्तव्यों तथा अमन्तव्यों का भी सार्वजनिक रूप से पुस्तक लिखकर प्रचार किया है। धार्मिक महापुरूष प्रायः अपनी मान्यताओं के विस्तृत व्याख्यात्मक ग्रन्थ लिख दिया करते हैं। उन्हीं ग्रन्थों को उनके शिष्य व अनुयायी […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 1)

अथ अपनी आत्मकथा के पिछले भाग ‘दो नम्बर का आदमी उर्फ आ ही गया बसन्त’ में मैं लिख चुका हूँ कि किस प्रकार प्रोमोशन होने के बाद मेरी पोस्टिंग कानपुर में होने का आदेश आया। मुझे 1 जनवरी 1996 (सोमवार) को इलाहाबाद बैंक के कानपुर मंडलीय कार्यालय में वरिष्ठ प्रबंधक (कम्प्यूटर) के रूप में कार्यभार […]

कविता

कविता : कैसे कह दोगे

कैसे कह दोगे कैसे कह दोगे कि खुद को मैं इतना भी समझ पाया अशको को अपनी आँखो मे यूं चुपके से छुपा पाया यादों के हँसी पलो को कभी ज़िन्दगी मे भुला पाया कैसे कह दोगे …….. याद ना करूंगा उन पलों को जिनमे खुद को ना आज़मा पाया रूह तक हो गई थी […]

कुण्डली/छंद

ताजी खबर : ताजी कुंडलिया

बारिश अबकी बार कम, होने का अनुमान। बेचारे इस सोच में, बैठे मरे किसान। बैठे मरे किसान, फसल कैसे बोएंगे। शीश धरा जो कर्ज, भला कैसे ढोएंगे। कह ‘पूतू’ कविराय, थमी हैं साँसें सबकी। और मरेगे लोग, अगर कम बारिश अबकी॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

कविता

छोड़ आए

सुबह की सुनहरी किरणों की आस में मैं तनहा रातों को सिसकता छोड़ आई   समेट कर रखे बस कांटे अपने दामन में फूल उनकी राहों में बिखरे छोड़ आई   लब हिल न सके उनसे बिछड़ते वक्त बस उनके दिल में अपनी धड़कन छोड़ आई   महफ़िल में गैरो की हाल-ऐ-दिल क्या सुनाती नाज़ […]

कविता पद्य साहित्य

तुम्हारे हर सवाल ….

तुम्हारे हर सवाल मेरे दिल के अन्दर उलफत मचाता रहेगा। न जाने कब तक यादों के झरोखो मे आशियाना बनाता रहेगा तुम्हारे हर कायदा को बरकरार तब- तक संजोकर रखूँगा मैं, जब- तक हुस्न के हर सलीके नजरों के रास्ते समाता रहेगा। तुम्हारे लबों से निकली लफ्जों के मिठास मन में आता रहेगा। तुम्हारे काले-काले […]