कविता

“पता, मेरे गाँव का”

क्यों पूछते हो मेरे गाँव का पता माफ करना गर हुयी कोई खता ||   अदब से रहता हूँ इसी इलाके में ऐसे विचार नहीं ठहरूं ठहाके में कहाँ आप और कहाँ यह खँडहर जमीन पे खड़ी है खुदके फिराके में ||   कुछ दूर जाकर सड़क से मुडती है सड़क फिर कई मोड मुड […]

कविता

भजन..मेरे साहिब

रहमतों से आपकी बेखबर तो मैं नहीं हूँ | साहिब हो तुम मैं तो बस दास ही हूँ | चाहकर भी नहीं उतर पाता खरा आपकी बातों पे | फिर भी अपने आशिष से दिखा देते हैं सही रास्ता | हर बात से हर ऐहसास से आपके धन्य हो जाता हूँ | चरणों में बस […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

फिर आँगन में नाचती , बूंदों संग उमंग । विरही मन प्यासा रहा, पिया न मेरे संग ।। बदरा आज उदास है , बरसत हैं ये नैन । पिया आस में आज भी , लम्बी होती रैन ।। सावन लेकर आ गया , शुभ संदेसा आज । पैरों में थिरकन हुई, बूंद बनी है साज़ […]

राजनीति

२५ जून — लोकतंत्र का काला दिवस

आज भारतीय लोकतंत्र का काला दिवस है। आज ही के दिन ४० साल पहले हिन्दुस्तान की मक्किका-ए-आज़म, निरंकुश तानाशाह इन्दिरा गांधी ने आपात्काल लगाकर लोकतंत्र का गला घोंटा था। भारत की सारी जनता (कांग्रेसियों, कम्युनिस्टों और चाटुकारों को छोड़कर) के मौलिक अधिकार रातोरात छीन लिए गए थे। लाखों नेता, जनता और छात्र जेल में ठूंस […]

कविता

मेरा सुहाग

मेरे सुहाग की लाली समर्पित है उन नौजवानों को जिनकी हर सुबह अपने सीने पर गोली खाने की कवायद के साथ शुरू होती है— मेरी सतरंगी चूड़ीयाँ लहराना चाहती है उन वीर नौजवानों के लिए संगीत बनकर जिनके कान बंदूक की खट-खट सुनने की आदी हो चुकी है— मैं अपनी यह चुनरिया बिछा देना चाहती […]

कविता

रिक्त नहीं थी मैं

तुमने कहा तुम अपना दर्द मुझे दो मैं उसें ख़ुशी मैं बदल दूंगा मान गई मैं तुमने कहा तुम अपने आँसूं मुझे दे दो मैं उसें हंसीं मैं बदल दूंगा मान गई मैं तुमने कहा तुम अपनी दरकन मुझे दो उसें जुड़ाव में बदल दूंगा मान गई मैं तुमने कहा तुम अपनी रिक्तता मुझे दो […]

कविता

पगडंडी –छाया चित्र

और कुछ पल बाद, एक साल और कम हो जाएगा तेरे मेरे बीच की दूरियां निरंतर कम हो रही हैं ठीक ही तो है देखूं जरा अवनी पर पुलकित हो रजनी पर चन्द्र किरण आई हैं चाँदी की चुनर ओढ़ प्रीतम से नयन जोड़ बरबस मुस्काई हैं खिड़की की ओट खड़ी कौतुक से देखरही संदेशा […]

आत्मकथा

स्मृति के पंख – 36

30 अप्रैल 1957 को राज की शादी हुई। डोली जाने के बाद कुछ ही दिन बाद मुझे तार मिला कि राज बीमार है। हम दोनों मुजफरनगर चले गये। वहाँ ऐसा चर्चा सुना कि पृथ्वीराज का भूत राज को चमड़ गया है और कुछ लोग घूंआ जलाकर राज से पूछताछ कर रहे थे। जब मैंने ऐसी […]

गीत/नवगीत

गीत : जन्म से पूर्व मुझे न मारो मुझको

देख रही हूं मिटता जीवन, छाया घोर अन्धेरा। हर पल जकड़े पथ में  मुझको, शंकाओं का घेरा। मेरे जीवन की डोरी को, माता मत यूं तोड़ो॥ मैं  भी जन्मूं इस धरती पर, मुझे अपनों से जोड़ो। क्यों इतनी निष्ठुर हुई माता ? क्या है मेरी गलती । हाय विधाता, कैसी दुनिया ? नारी, नारी को […]