Monthly Archives: July 2015

  • गुरु पूर्णिमा

    गुरु पूर्णिमा

    गुरु पूर्णिमा एक पर्व ही नहीं जीवन का यथार्थ है इसे हृदय से मनाएँ भले ही फिर मंदिर में दीपक न जलाएँ सोचो अगर गुरु परंपरा न होती तो ज्ञानियों की नई पौध कौन उगाता ……....




  • जुल्फों को बादल लिख दूं….

    जुल्फों को बादल लिख दूं….

    जुल्फों को बादल लिख दूं, आंचल को चंचल घटा लिखूं । कायनात मे ऐसा क्या है, जिसको चेहरा तेरा लिखूं॥ गजरे को गुलशन लिख दूंगा, कजरा लिख दूं श्याम । चितवन चपल चकोर तेरे ,नयनो को...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मुझपे ही नही मेरा इक्तिहार ज़रा सा , आप कहते हो कि करो इंतजार जरा सा ।। उम्र भर का दर्द दिया है मुझे बदले में , दो पल जो किया था तूने प्यार जरा सा...