सामाजिक

गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा एक पर्व ही नहीं जीवन का यथार्थ है इसे हृदय से मनाएँ भले ही फिर मंदिर में दीपक न जलाएँ सोचो अगर गुरु परंपरा न होती तो ज्ञानियों की नई पौध कौन उगाता …….  कौन हमको गढ़-गढ़ कर सुंदर बनाता। किसी ने सही कहा है कि हर मनुष्य की प्रथम पाठशाला हमारा घर […]

स्वास्थ्य

तनावमुक्त होने के उपाय

पिछले लेख में मैंने बताया था तनावग्रस्त रहने से कोई समस्या हल नहीं होती, बल्कि नई समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कई सज्जनों ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए पूछा है कि तनावमुक्त रहने का क्या उपाय है। उनकी जिज्ञासा को शान्त करने के लिए यहां मैं तनावमुक्त रहने के अनुभवजन्य उपाय बता रहा हूं। सबसे […]

बाल कहानी

बाल कहानी : अनोखे अतिथि

सुदूर दक्षिण स्थित केरल प्रांत के रामेश्वरम मे एक छोटा सा गाँव था , जहाँ मछुवारा समुदाय के अनेक लोग रहते थे | समुद्र मे मछलियाँ पकड़ना और किराए पर नावें चलाना रोजी रोटी का  मुख्य जरिया था | सभी मिलजुल कर रहते थे | इन्ही के बीच संघर्षों मे पलने वाला एक बच्चा अपने […]

हाइकु/सेदोका

पच्चीस हाइकु – अमन चाँदपुरी

(1) गूँजी हैं चीखें शब्द-शब्द हैं मौन रोता हैं कौन। (2) खेत पूछते क्यों डुबोया तुमने बोलो न पानी। (3) न तुम, न मैं कौन भूल पाया है बीता समय। (4) चोरों का राज्य बिना रूपये दिये बने न काज। (5) बरसे नैन तुम्हारे बिन चैन अब न आये। (6) बड़ी कठिन जीवन डगरियाँ मान […]

गीत/नवगीत

जुल्फों को बादल लिख दूं….

जुल्फों को बादल लिख दूं, आंचल को चंचल घटा लिखूं । कायनात मे ऐसा क्या है, जिसको चेहरा तेरा लिखूं॥ गजरे को गुलशन लिख दूंगा, कजरा लिख दूं श्याम । चितवन चपल चकोर तेरे ,नयनो को लिख दूं तान ॥ मुस्काते तेरे अधरों को कलियां, ऐ दिलवरा लिखूं…… कायनात मे ऐसा क्या है, जिसको चेहरा […]

लघुकथा

“अतीत और गुरू जनों को सादर साष्टांग”

अनायास हंसी आ जाती है | अतीत की बातें कभी सोचकर तो कभी सुनकर | जब हर मोड पर वयों वृद्ध,कहते रहते हैं कि अतीत को भूलना ही बेहतर है | क्या सचमुच वें लोंग भुला पाए हैं अपने अतीत को | शायद नहीं | क्या अतीत से उनकी झुझालाहट उन्हें चैन से जीने दे […]

राजनीति

आतंकी याकूब को फांसी न्याय की जीत

1993 में हुए मुम्बई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोपी याकूब मेमन को आखिरकार 22 साल बाद फांसी हो ही गयी। इससे उन लोगों को वास्तविक इंसाफ मिला है जो कि इन बम धमाकों के शिकार हो गये थे। इन धमाकों में 257 लोग मारे गये थे व कम से कम 700 लोग घायल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुझपे ही नही मेरा इक्तिहार ज़रा सा , आप कहते हो कि करो इंतजार जरा सा ।। उम्र भर का दर्द दिया है मुझे बदले में , दो पल जो किया था तूने प्यार जरा सा ।। अब नही तेरे वादे पे यक़ीन मुझको , लिखकर दे काग़ज़ पर ये क़रार जरा सा ।। वादा […]

गीत/नवगीत

० गुरु-वन्दना : पुकार ०

नाव पड़ी मझधार, लगा दो गुरुवर नैया पार कोई न खेवनहार, लगा दो गुरुवर नैया पार चारों ओर घना अँधियारा दिखता नहीं है कोई किनारा टूट गई पतवार , लगा दो गुरुवर नैया पार नाव पड़ी मझधार…….. तुझको छोड़ कहाँ मैं जाऊँ तू ही दिखे जहाँ मैं जाऊँ तुम अनन्त अविकार,लगा दो गुरुवर नैया पार […]

इतिहास

इतिहास प्रदूषण और पं. लेखराम एवं वीर सावरकर के जीवन विषयक सत्य घटनाओं का प्रकाश

ओ३म् मनुष्य अल्पज्ञ है इसलिये उससे अज्ञानता व अनजाने में यदा-कदा भूल व त्रुटियां होती रहती है। इतिहास में भी बहुत कुछ जो लिखा होता है, उसके लेखक सर्वज्ञ न होने से उनसे भी न चाहकर भी कुछ त्रुटियां हो ही जाती हैं। अतः इतिहास विषयक घटनाओं की भी विवेचना व छानबीन होती रहनी चाहिये […]