कविता

मुझे भी जीने दे

जीना है मुझे…..हाँ जीना है मुझे भी …मुझे भी जीने दे |
ना घोल ज़हर नफ़रतों का यूँ कि…..
मुझे भी प्यार से दुनिया मे रह लेने दे |
जीना है मुझे….हाँ जीना है मुझे भी…..मुझे भी जीने दे|
रूह भी थरथराए कभी ,कभी आँख पथरा जाए |
कैसा यह शहर है तेरा मुझे समझ ना आए |
आँसुओं को ना रोक आज कि हैं यह उम्मीद के .
इन्हें आज जीभर के यूँही बह लेने दे |
जीना है मुझे…हाँ जीना है मुझे भी…..मुझे भी जीने दे |||

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |

One thought on “मुझे भी जीने दे

  • विजय कुमार सिंघल

    बढ़िया !

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