कविता पद्य साहित्य

सदा अपने चरण -कमल की गुरुदेव भक्ति मुझे दे दो |

सदा अपने चरण -कमल की गुरुदेव भक्ति मुझे दे दो |

मेरा सम्पूर्ण जीवन अपनी भक्ति में ही लगा दो |

संसार रूपी माया से अब तुम मुझे छुड़ा दो |

मेरा यहाँ कुछ नहीं यह अटल ज्ञान मुझे दे दो |

यह जीवन अनमोल है इसे ब्यर्थ न होने दो |

मेरा तन -मन- धन सब परमार्थ में ही लगा दो |

जीवन भर भटकता है ये जीव सुख की खोज में |

मगर दुःख ही दुःख मिलती है उसे इस जहाँ में |

अब सब कुछ सहने की शक्ति मुझे दे दो |

बहुत भटकी , दुःख पायी अब भी तुम बचा लो |

मेरी बीच भवर में कड़ी नैया को अब तुम पार लगा दो |

ज्ञान -भक्ति की ज्योति अब मेरे मन में जला दो |

हमे अपने शरण में लेकर मेरी सभी तृष्णा मिटा दो |

मैं बुद्धिहीन प्राणी हूँ तुम मुझे स द्द्भुधि दे दो |

मेरे सारे पाप -संताप को मिटा कर शांति मुझे दे दो |

सदा अपने चरण -कमल की गुरुदेव भक्ति मुझे दे दो

परिचय - निवेदिता चतुर्वेदी

बी.एससी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी , सासाराम , रोहतास , बिहार , ८२११०४

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