Monthly Archives: July 2015


  • लघुकथा : नियम

    लघुकथा : नियम

    रूल बना दिया था उसने। आज से कुछ भी हो सब एक साथ डेनिंग टेबल पर डिनर करेंगे। दिन रात फ़ोन में आँखें गढ़ाए रहने वाले उसके बच्चे परस्पर संवाद भी लिखकर करते । रसोई से...

  • गीत का जन्म

    गीत का जन्म

    अकुलित हो रहा गर्भ मे कोई गीत है अंग करते हैं किलोल गर्भ मे कोई गीत है मन प्रफुल्लित हो रहा गर्भ मे कोई गीत है प्रसव का हो गया समय गर्भ मे कोई गीत है...

  • दिल प्राण आपके चरणों में…..

    दिल प्राण आपके चरणों में…..

    आपका चरणवंदन गुरुदेव गुणवान, निधान ज्ञान सागर प्रणाम आपके चरणों में॥ हे गुरुदेव हे पथदर्शक , दिल प्राण आपके चरणों में॥ हम मूढ मति, तुम गूढ ज्ञान के ज्ञाता,गुरुवर नमन तुम्हे। तुम ज्ञान दीप रोशन कर्ता,...


  • सरोजों का उभरना भी !

    सरोजों का उभरना भी !

    सरोजों का उभरना भी, सूर्य के ओज से होता; सरोवर का हृदय मंथन, उसे उद्गार से भरता ! समाधित जल समाहित चित, तरंगित सरोरुह करता; रंगे पल्लव भंगिमा भव, दिवाकर रश्मि से देता ! समादर शशि...

  • जय जनतंत्र हमारा

    जय जनतंत्र हमारा

    शत-शत वंदन अंतस तल से जय जनतंत्र हमारा अभिमान पुंज, अधिकार प्रदाता पावन पूजित गंगा दीप्त, सुशोभित वैश्विक पटपर गौरव’पूर्ण तिरंगा दिनकर वर बरसाता, हिमकर नेह लुटाता कल-कल वैदिक धारा शत-शत वंदन भारत माँ का जय...


  • शिशुगीत – ७

    शिशुगीत – ७

    १. जूते कील, धूल से हमें बचाते पॉलिश पा चमचम हो जाते काले हों या रंग-बिरंगे जूते काम हमेशा आते २. चप्पल जैसे जूता वैसे चप्पल इसके बिन मत फिरना इक पल कॉकरोच पर पैर पड़ा...