कविता पद्य साहित्य

सदा अपने चरण -कमल की गुरुदेव भक्ति मुझे दे दो |

सदा अपने चरण -कमल की गुरुदेव भक्ति मुझे दे दो | मेरा सम्पूर्ण जीवन अपनी भक्ति में ही लगा दो | संसार रूपी माया से अब तुम मुझे छुड़ा दो | मेरा यहाँ कुछ नहीं यह अटल ज्ञान मुझे दे दो | यह जीवन अनमोल है इसे ब्यर्थ न होने दो | मेरा तन -मन- […]

लघुकथा

लघुकथा : नियम

रूल बना दिया था उसने। आज से कुछ भी हो सब एक साथ डेनिंग टेबल पर डिनर करेंगे। दिन रात फ़ोन में आँखें गढ़ाए रहने वाले उसके बच्चे परस्पर संवाद भी लिखकर करते । रसोई से डोंगे लाते हुए उसने पति को बिटिया को आवाज़ लगाने को कहा। तीन बार आवाज़ लगाने पर भी जब […]

कविता

गीत का जन्म

अकुलित हो रहा गर्भ मे कोई गीत है अंग करते हैं किलोल गर्भ मे कोई गीत है मन प्रफुल्लित हो रहा गर्भ मे कोई गीत है प्रसव का हो गया समय गर्भ मे कोई गीत है वेदना प्रसव की मुख पर है छाई हुई मन हिलोरें ले रहा जन्मता कोई गीत है. नौ माह कोख […]

कविता

दिल प्राण आपके चरणों में…..

आपका चरणवंदन गुरुदेव गुणवान, निधान ज्ञान सागर प्रणाम आपके चरणों में॥ हे गुरुदेव हे पथदर्शक , दिल प्राण आपके चरणों में॥ हम मूढ मति, तुम गूढ ज्ञान के ज्ञाता,गुरुवर नमन तुम्हे। तुम ज्ञान दीप रोशन कर्ता, आचमन तुम्हे आचमन तुम्हे॥ मिल गया गुरु वरदान, ये जीवन आपके चरणों में…. हे गुरुदेव हे पथदर्शक , दिल […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 30)

शाखा का हाल पंचकूला में संघ कार्य अच्छा होता है। स्वयंसेवकों की एक बड़ी संख्या है, जिनमें लगभग सभी खाते-पीते परिवारों के हैं। प्रारम्भ में मेरा किसी स्वयंसेवक से कोई परिचय नहीं था, जैसा कि स्वाभाविक है, क्योंकि पंचकूला मैं पहली बार गया था। मेरे पास केवल चंडीगढ़ के संघ कार्यालय का पता था, जो […]

कविता

सरोजों का उभरना भी !

सरोजों का उभरना भी, सूर्य के ओज से होता; सरोवर का हृदय मंथन, उसे उद्गार से भरता ! समाधित जल समाहित चित, तरंगित सरोरुह करता; रंगे पल्लव भंगिमा भव, दिवाकर रश्मि से देता ! समादर शशि है करता, ज्योत्सना जग जलधि देता; जगा स्फूर्ति संवित धृति, सुगन्धित सुमन हर करता ! उरों में जो रही […]

गीत/नवगीत

जय जनतंत्र हमारा

शत-शत वंदन अंतस तल से जय जनतंत्र हमारा अभिमान पुंज, अधिकार प्रदाता पावन पूजित गंगा दीप्त, सुशोभित वैश्विक पटपर गौरव’पूर्ण तिरंगा दिनकर वर बरसाता, हिमकर नेह लुटाता कल-कल वैदिक धारा शत-शत वंदन भारत माँ का जय जनतंत्र हमारा जय हो, जय हो, जय हो जन-गण की जय हो

कविता

परछाई भी हूँ और मैं तेरा हौसला भी हूँ

परछाई भी हूँ और मैं तेरा हौसला भी हूँ, कोई साथ नहीं पर हर कदम मैं तेरे साथ हूँ, तेरे रूकने से वक्त तो रूकता नहीं पर मैं ठहर जाती हूँ, सहम जाती हूँ, तेरी हर तकलीफ से वाकीफ हूँ, मैं खुदगर्ज नहीं हूँ ना ही मतलबी हूँ, तुझे अंधेरे में अकेला छोड़ देती हूँ […]

शिशुगीत

शिशुगीत – ७

१. जूते कील, धूल से हमें बचाते पॉलिश पा चमचम हो जाते काले हों या रंग-बिरंगे जूते काम हमेशा आते २. चप्पल जैसे जूता वैसे चप्पल इसके बिन मत फिरना इक पल कॉकरोच पर पैर पड़ा तो तन में हो जाएगी हलचल ३. मच्छरदानी रोज लगाओ मच्छरदानी बैठ उसी में पढ़ो कहानी वरना मच्छर के […]