Monthly Archives: July 2015


  • मुझे भी जीने दे

    मुझे भी जीने दे

    जीना है मुझे…..हाँ जीना है मुझे भी …मुझे भी जीने दे | ना घोल ज़हर नफ़रतों का यूँ कि….. मुझे भी प्यार से दुनिया मे रह लेने दे | जीना है मुझे….हाँ जीना है मुझे भी…..मुझे...

  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    धुँआ-धुँआ हो गयी जिंदगी अब तुम बिन कतरा कतरा बह गये सपने सब तुम बिन होते जो साथ बनते तुम मेरी ग़ज़ल गुंजन मेरे शब्द रूठे मुझसे न जाने कब तुम बिन । ****************************** मुमकिन नही...

  • जीवनपर्यंत

    जीवनपर्यंत

    प्रतिक्षण, प्रतिपल, प्रतिदिन, मेरे हृदय के दीपक धिरे-धिरे जल। मेरे प्रिये का पथ अलोकित कर। मृदु आभास, अपरिमित, जीवन का अणु, तुम धुप की तरह फैलाओ पंख। मन्द-मन्द दीपक की लौह जल। विश्वसुलभ, जल पाया, ज्वाला...