गीतिका/ग़ज़ल

मानसूनी बारिश के क्या हसीं नज़ारे हैं

मानसूनी बारिश के, क्या हसीं नज़ारे हैं। रंग सारे धरती पर, इन्द्र ने उतारे हैं।   छा गया है बागों में, सुर्ख रंग कलियों पर, तितलियों के भँवरों से, हो रहे इशारे हैं।   सौंधी-सौंधी माटी में, रंग है उमंगों का, तर हुए किसानों के, खेत-खेत प्यारे हैं।   मेघों ने बिछाया है, श्याम रंग […]

कविता

मुझे भी जीने दे

जीना है मुझे…..हाँ जीना है मुझे भी …मुझे भी जीने दे | ना घोल ज़हर नफ़रतों का यूँ कि….. मुझे भी प्यार से दुनिया मे रह लेने दे | जीना है मुझे….हाँ जीना है मुझे भी…..मुझे भी जीने दे| रूह भी थरथराए कभी ,कभी आँख पथरा जाए | कैसा यह शहर है तेरा मुझे समझ […]

मुक्तक/दोहा

दो मुक्तक

धुँआ-धुँआ हो गयी जिंदगी अब तुम बिन कतरा कतरा बह गये सपने सब तुम बिन होते जो साथ बनते तुम मेरी ग़ज़ल गुंजन मेरे शब्द रूठे मुझसे न जाने कब तुम बिन । ****************************** मुमकिन नही होता मुहब्बत को बयां करना बेवफा जमाने में दिल थोडा सा धीरज धरना चुभती रहेंगी शूल बन चाहत दिल […]

कविता पद्य साहित्य

जीवनपर्यंत

प्रतिक्षण, प्रतिपल, प्रतिदिन, मेरे हृदय के दीपक धिरे-धिरे जल। मेरे प्रिये का पथ अलोकित कर। मृदु आभास, अपरिमित, जीवन का अणु, तुम धुप की तरह फैलाओ पंख। मन्द-मन्द दीपक की लौह जल। विश्वसुलभ, जल पाया, ज्वाला कण, सभी शीतलता एवं कोमलता का नूतन। तुम मेरे जीवन में नित्य प्रस्फुटित कर। अग्नोन्मुख जीवन पर्यंत, अग्रसर कर। […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 15)

मनीषा का विवाह सन् 2000 में कानपुर वाले भाईसाहब श्री सूरजभान की दूसरी पुत्री मनीषा का विवाह निश्चित हुआ। वह झाँसी मेडीकल कालेज से एम.बी.बी.एस. कर चुकी थी, परन्तु पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एडमीशन न होने के कारण लगभग बेरोजगार थी। उसका विवाह उसकी बड़ी बहन डा. समीक्षा के ननदेऊ श्री अश्वनी कुमार गुप्ता ने […]