कविता

माँ का आँचल

जबसे आया हूँ जहाँ में तेरे आँचल में हूँ माँ मैं। पहले साड़ी का किनारा अब दुआओं की छाँव में। जब मैं डगमग,डगमग चलता लाख बलाएँ लेती थी। और कभी मैं गिर के रो दूँ तो बाहों में भर लेती थी। कभी जो रूठूँ तो माँ मुझे बड़े जतन से मनाती थी। गोद में बिठा […]

ब्लॉग/परिचर्चा राजनीति

नीतीश के इरादे

२०१४ के लोक सभा चुनाव से पहले मोदी जी ने जनता को बहुत सारे सपने दिखाए. जनता ने उन्हें पूर्ण समर्थन दिया. १५ महीनों में कोई खास परिवर्तन हुआ है, ऐसा नजर नहीं आ रहा. पर मोदी जी अपनी उपलब्धियां गिनाते नहीं थकते! फिर आया दिल्ली विधान सभा का चुनाव. इसके लिए भी केजरीवाल ने […]

राजनीति

औरंगज़ेब रोड के नाम परिवर्तन को लेकर रुदाली गान

जैसा कि अपेक्षित था वैसा ही हुआ। औरंगज़ेब के नाम पर सड़क के नाम का परिवर्तन कर रुदाली गान प्रारम्भ हो गया हैं। मुसलमान, वामपंथी, सिविल सोसाइटी के आदर्श एक्टिविस्ट, छदम इतिहासकार, पेज थ्री के मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के पेट में सबसे अधिक मरोड़ हो रही हैं। कोई औरंगज़ेब को न्यायप्रिय शासक, कोई जिन्दा पीर, […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सच्चे तीर्थ माता-पिता-आचार्य व आप्त विद्वानों के सदुपदेश आदि हैं।

ओ३म् आजकल कुछ स्थानों अथवा नदी व सरोवरों को तीर्थ कहा जाता है। किसी से कोई पूछे कि इन तीर्थ स्थानों से इतर देश के अन्य सभी स्थान सच्चे तीर्थ क्यों नहीं है, तो इसका उत्तर शायद कोई नहीं दे सकेगा। तीर्थ शब्द संस्कृत भाषा का है और इसका प्रयोग वेद व वैदिक साहित्य में […]

कविता सामाजिक

भगवान ना बेचिए

दोस्तों धर्म की नाम पर अब दुकान मत खोलिए, बना कर मिटी से सुरत भगवान की उन्हें ना बेचिए, एक अपने खुद के फायदे के खातिर दोस्तों, चंद रुपए में भगवान की मूरत ना बेचिए, जिन्हें कोई खरीद नहीं सकता उनकी मूरत बेचने से पहले, अपने हर एक किये हुए पाप के वजन को तौल […]

कविता

रिश्वत का दौर

आज के समय में एक जरूरत बन के शामिल हो गया है रिश्वत, किसी की दुर्घटना में मृत्यू हो जाए तो भी देना पड़ता है रिश्वत, अब तो रिश्ते नातो में भी नहीं होते प्यार की बाते, भाई अपने भाई को मरवाने के लिए देता है रिश्वत, एक दिन ऐसा भी आएगा कभी कल्पना ना […]

गीतिका/ग़ज़ल

मौत बना दोस्त…

जिंदगी में जाने ये कैसा गम का हवा चला है, मौत मेरा दोस्त बनने आज खुद ही निकल पड़ा है, हर एक ख्वाब टूट चूका है मेरा एक एक कर के, मुझसे नाराज मेरे जिंदगी का हर एक खुशि हो गया, मौत मेरा दोस्त बनने आज खुद ही निकल पड़ा है, जानता तो मैं भी […]

कविता

आओ मेरे कान्हा आओ,

आओ मेरे कान्हा आओ, आपने ही तो गीता में उपदेश दिया है… आत्मा अजर है, अमर है आत्मा कभी नहीं मरती, मरता है तो यह नश्वर शरीर- पंच तत्व में हो जाता है विलीन पर आत्मा अजर है, अमर है आत्मा कभी नहीं मरती, .. अपने परमात्मा में हो जाती है लीन, हे मेरे प्रभु […]

गीत/नवगीत

नैन दर्शन को तरसे हैं श्याम…

नैन दर्शन को तरसे हैं श्याम , कान्हा सूरत दिखा दो। दर्द बढने लगें हैं तमाम, प्रेम बंसी बजा दो॥ बढ रहें अंधेरे धरा पर, पाप सब को है घेरे यहां पर। लेके आ जाओ युग फेर द्वापर, पापियों को मिटा दों॥ दर्द बढने लगें हैं तमाम, प्रेम बंसी बजा दो… सर मुकुट मोर पंखो […]

कविता

आम आदमी

रोज टूटता हूं, बिखरता हूं हर पल जीता हूं, मरता हूं बे इन्तिहा बेडियां है, पैरो में फिर भी, हर दर्द सहकर चलता हूं आम आदमी हूं, सरकारी व्यवस्था की आग में हर रोज जलता हूं। निकलता हूं हर रोज घर कुछ अच्छे की आस में बच्चों की रोटी और कुछ खुशियों की तलाश में […]