Monthly Archives: August 2015

  • माँ का आँचल

    माँ का आँचल

    जबसे आया हूँ जहाँ में तेरे आँचल में हूँ माँ मैं। पहले साड़ी का किनारा अब दुआओं की छाँव में। जब मैं डगमग,डगमग चलता लाख बलाएँ लेती थी। और कभी मैं गिर के रो दूँ तो...

  • नीतीश के इरादे

    नीतीश के इरादे

    २०१४ के लोक सभा चुनाव से पहले मोदी जी ने जनता को बहुत सारे सपने दिखाए. जनता ने उन्हें पूर्ण समर्थन दिया. १५ महीनों में कोई खास परिवर्तन हुआ है, ऐसा नजर नहीं आ रहा. पर...



  • भगवान ना बेचिए

    भगवान ना बेचिए

    दोस्तों धर्म की नाम पर अब दुकान मत खोलिए, बना कर मिटी से सुरत भगवान की उन्हें ना बेचिए, एक अपने खुद के फायदे के खातिर दोस्तों, चंद रुपए में भगवान की मूरत ना बेचिए, जिन्हें...

  • रिश्वत का दौर

    रिश्वत का दौर

    आज के समय में एक जरूरत बन के शामिल हो गया है रिश्वत, किसी की दुर्घटना में मृत्यू हो जाए तो भी देना पड़ता है रिश्वत, अब तो रिश्ते नातो में भी नहीं होते प्यार की...

  • मौत बना दोस्त…

    मौत बना दोस्त…

    जिंदगी में जाने ये कैसा गम का हवा चला है, मौत मेरा दोस्त बनने आज खुद ही निकल पड़ा है, हर एक ख्वाब टूट चूका है मेरा एक एक कर के, मुझसे नाराज मेरे जिंदगी का...



  • आम आदमी

    आम आदमी

    रोज टूटता हूं, बिखरता हूं हर पल जीता हूं, मरता हूं बे इन्तिहा बेडियां है, पैरो में फिर भी, हर दर्द सहकर चलता हूं आम आदमी हूं, सरकारी व्यवस्था की आग में हर रोज जलता हूं।...