गीतिका/ग़ज़ल

खुद को में, खुद से मिलाना चाहता हूं…

खुद को में, खुद से मिलाना चाहता हूं।
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं॥

ढूंढ कर खुशियों के ये दो चार पल
खुद को खुशकिस्मत बनाना चाहता हूं….
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं….

हौसलों के पंख दे कर हसरतों को
आसमां को छू के आना चाहता हूं…..
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं….

पत्थरों पर चलके जो छाले पडें है
वो सभी तुझको दिखाना चाहता हूं….
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं….

तुझसे जो वादे किये थे, चाहतों के
वो सभी वादे निभाना चाहता हूं….
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं….

जिन्दगी भर, तु मनाने को मुझे रोती रही
आज मे तुझको मनाना चाहता हूं……
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं….

खुद को में, खुद से मिलाना चाहता हूं।
जिन्दगीं, तेरा साथ पाना चाहता हूं…..

सतीश बंसल