कविता

अनमोल प्यार ….

वो बचपन की यादें, वही दुलार ले के आजा।
इस राखी अपना अनमोल प्यार ले के आजा॥

रेशम की डोरी में, पिरो कर आशीष अपनें
दुवाओं का अपनी बेमोल, संसार ले के आजा….
इस राखी अपना अनमोल प्यार ले के आजा…..

मुस्काते चेहरे पर, रिश्तों की चमक लिये।
परम्परा का और रीती का, श्रंगार लेके आजा….
इस राखी अपना अनमोल प्यार ले के आजा…..

चंदन के तिलक और दीप की ज्योति से।
सुसज्जित आरती की बहार ले के आजा…
इस राखी अपना अनमोल प्यार ले के आजा…..

बांधकर अपनी दुवा का, बंधन मेरी कलाई पर।
भाई की सुरक्षा का, उपहार ले के आजा…
इस राखी अपना अनमोल प्यार ले के आजा….

सांस्कृतिक मूल्यों की विरासत में लपेटकर।
भाई बहन के पवित्र रिश्ते का सार ले के आजा…
इस राखी अपना अनमोल प्यार ले के आजा….

सतीश बंसल

*सतीश बंसल

पिता का नाम : श्री श्री निवास बंसल जन्म स्थान : ग्राम- घिटौरा, जिला - बागपत (उत्तर प्रदेश) वर्तमान निवास : पंडितवाडी, देहरादून फोन : 09368463261 जन्म तिथि : 02-09-1968 : B.A 1990 CCS University Meerut (UP) लेखन : हिन्दी कविता एवं गीत प्रकाशित पुस्तकें : " गुनगुनांने लगीं खामोशियां" "चलो गुनगुनाएँ" , "कवि नही हूँ मैं", "संस्कार के दीप" एवं "रोशनी के लिए" विषय : सभी सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक, बेटी बचाव, गौ हत्या, प्रकृति, पारिवारिक रिश्ते , आध्यात्मिक, देश भक्ति, वीर रस एवं प्रेम गीत.

6 thoughts on “अनमोल प्यार ….

  • शशि शर्मा 'ख़ुशी'

    पावन भाव लिये, सुंदर रचना

    • सतीश बंसल

      आफका बहुत शुक्रिया शशी जी
      ..

  • वैभव दुबे "विशेष"

    सांस्कृतिक मूल्यों की विरासत में लपेटकर।
    भाई बहन के पवित्र रिश्ते का सार ले के आजा…
    बेहतरीन रचना…

    • सतीश बंसल

      शुक्रिया वैभव जी…

  • विजय कुमार सिंघल

    बहुत सुंदर कविता !

    • सतीश बंसल

      बहुत आभार विजय जी…
      आपका उत्साहवर्धन और लिखने को प्रेरित करता है..

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