गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल- “वो एक पल”

वो कितना सुखमय अवसर था. हम दोनों का मौन मुखर था शब्दों ने चुप्पी साधी थी, बोल रहा अक्षर-अक्षर था. मेरी बाँहों में चन्दा था, धरती पर उतरा अम्बर था. सागर के भीतर थी सरिता, या सरिता में ही सागर था. कोई और नहीं था सँग में, संग प्रिया के बस प्रियवर था. वो जीवन […]

गीत/नवगीत

गीत : बेटी की शिक्षा

कलम उठाई है जो तुमने बेटी का अधिकार लिखो शिक्षित हो बेटी हर घर में वीणा का अवतार लिखो लिख दो सारे अधिकार अभी बेटी का दामन भरना है तोड़ पुरानी जंजीरो को आज नया कुछ करना है वर्णों में हुंकार भरी हो आज वही अंगार लिखो शिक्षित हो बेटी हर घर में वीणा का […]

हास्य व्यंग्य

हास्य गीतिका

वो सूखी लीद तुम अपने तबेले से हटा लेना। जहाँतक हो सके सब गंद चादर की छुड़ा लेना। तुम्हारे घर मुझे आना तभी यह बात बोली है, खजेले कुत्ते को अपने दुआरे से भगा लेना। निहायत झक्क एक दुर्दांत दिखती रोज थोबड़ पे, गुजारिश है मेरी तुमसे जरा दाढ़ी बना लेना। न बदबू आए कमरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल( जिंदगी)

ग़ज़ल( जिंदगी) जिनके साथ रहना हैं नहीं मिलते क्यों दिल उनसे खट्टी मीठी यादों को संजोने का है खेल जिंदगी। दिल के पास हैं लेकिन निगाहों से बह ओझल हैं क्यों असुओं से भिगोने का है खेल जिंदगी। किसी के खो गए अपने किसी ने पा लिए सपनें क्या पाने और खोने का है खेल […]

गीत/नवगीत

मेरे वादे मुझे याद हैं हमसफर…

मेरे वादे मुझे याद हैं हमसफर, तेरे वादे तुझे याद हों कि ना हो। तुमको दिल में बसाया है दिल की तरहा, हम तेरे दिल में आबाद हो कि ना हो॥ मेरे वादे मुझे याद हैं हमसफर…. आज भी मेरे सपनों की ताबीर तुम जिन्दगी के ख्यालों की तस्वीर तुम चाहता हूं तुम्हे जिन्दगी की […]

कविता

मां मुझे फिर फिर गोद में अपनी सुला लो…

मां मुझे फिर फिर गोद में अपनी सुला लो प्यार से सर हाथ फेरो और बला लो। डर मुझे लगने लगा है इस जहां से कह के लल्ला अपनें आंचल में छुपा लो॥ तेरा वो झीना सा आंचल, बनके मेरी ढाल मां। टालता था हर बला को, दूर वो हर हाल मां॥ फिर परेशानी नें […]

कविता

हिंदी

चौदह सितम्बर हिंदी दिवस का दिन हिन्दीमय भारत चारों तरफ सम्मलेन, संगोष्ठी ,भाषण सरकारी कार्यालयों ,संगठनों ,संघों की दीवारों पर शोभित बड़े बड़े पोस्टर हिंदी का गुणगान करते हुए हिंदी की शान में गर्वोक्ति कहीं कहीं हिंदी की दुर्दशा पर स्वीकारोक्ति !! पन्द्रह सितम्बर — सभी समाचार पत्रों में डंके बजाते समाचार की हमने कहाँ […]

कविता

जल ही जीवन है

बचपन से हमें याद दिलाती थी दादी नानी। जितनी आवश्यकता हो, उतना ही खर्च करो पानी।। बडे़ बूढ़ों की बात पर हमने कभी नहीं मानी। पीने के पानी के लिए भी आज हो रही है परेशानी।। तालाबों कुओं, नदियों में कम हो गया है पानी। इंसान की आंखों में भी अब नजर नही आता पानी।। […]

उपन्यास अंश

अधूरी कहानी: अध्याय-29: कुछ दिन पहले

कुछ दिन पहले दिल्ली की एक स्नेहा नाम की लड़की की दोस्ती जयपुर के एक समीर नाम के लड़के से फेसबुक पर हुई वे दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे इनकी बातें दिन पर दिन बढ़ते चली जा रही थी और कब ये दोस्ती प्यार में बदल गयी पता ही नहीं चला। एक दिन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

किसने किसका दिल तोड़ा ये सारे ज़माने को है पता, कौन उजड़ा और कौन बसा ये सारे ज़माने को है पता किसने तोड़ी इश्क की कसमें प्यार के वादे भूला कौन, कौन वफा की राह चला ये सारे ज़माने को है पता इक तू ही था दुनिया में जो समझ सका ना हाल मेरा, मैं […]