Monthly Archives: September 2015

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तनहा रातों का उदास मंजर जब होता है दिल तन्हाई के साये में सिसक के रोता है गुम होता है जब यादों के भंवर में यह आँखों के प्यालों को अश्कों से भिगोता है आस्तीनों में...


  • ये पतिदेव

    ये पतिदेव

    उफ्फ्फ यह पतिदेव भी क्या-क्या गज़ब ढाते हैं शादी के कुछ वर्षों में ही यह कितना बदल जाते हैं पहले वर्ष में कहते छोड़ो न काम काज को चंद घडीयां तो आओ मेरे पास बैठ जाओ...

  • सबक सिखाना जरुरी है

    सबक सिखाना जरुरी है

    इक आग सी अब सारे दिलों में जलाना जरुरी है इन पाकिस्तानियों को सबक सिखाना जरुरी है दे दी बहुत छूट इन्हें प्यार से बहुत समझा लिया प्यार भरी बातों से बहुत इनको पुचकार लिया रोक...


  • वर्ण पिरामिड

    वर्ण पिरामिड

    सात पंक्तियों की रचना ……. पहली पंक्ति एक वर्ण सातवीं पंक्ति सात वर्ण जी नन्हीं नीड़ में संवर्धक मनु सिखाते तंगी में कुंजन चिड़िया व पिण्डज ~~~ हे ! मन अन्दोरी अवीक्षित न होड़ी बन लाज...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इंसानियत इंसान के हाथों कतल होती रही, नफरतों के बीज दुनिया किस कदर बोती रही बैठी रही सरकार बस कानों में डाले ऊंगलियाँ, हैवानियत हंसती रही, मासूमियत मरती रही हम तरसते ही रहे पानी की इक-इक...

  • वीरान सी गलियां

    वीरान सी गलियां

    दूर तक जहां भी जाती है नजर एक सूना सा मंजर आता है नजर… वीरान सी गलियां है, हर आंगन खाली है उजडे से गुलशन हैं, हैरान सा माली है वीरान सी गलियां…. होली अब रंगों...

  • शब्द !

    शब्द !

    शब्द कभी चुभ जाते हैं ,कभी सहला जाते है ,कभी रुला जाते हैं ,कितने शब्द ! शब्दों की एक अपनी विस्तृत दुनियां है शब्दों के अपने अहसास हैं ,ख़ुशी के गम के प्रेम के असंख्य भावनाएं...