गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तनहा रातों का उदास मंजर जब होता है दिल तन्हाई के साये में सिसक के रोता है गुम होता है जब यादों के भंवर में यह आँखों के प्यालों को अश्कों से भिगोता है आस्तीनों में ही छुपे जब खंजरों को देखा अंदाजा हुआ तब कैसे कोई नश्तर चुभोता है न पूछो रुसवाई का आलम […]

अन्य लेख सामाजिक

अमर शहीद भगत सिंह को श्रद्धाजंली

ओ३म् देश को अंग्रेजों के अत्याचारों से मुक्त कराने तथा गुलामी दूर कर देशवासियों को स्वतन्त्र कराने के मन्त्रद्रष्टा शहीद भगत सिंह जी का आज २८ सितम्बर को 109 वां जन्म  दिवस है। शहीद भगद सिंह ने देश को स्वतन्त्र कराने के लिए जो देशभक्ति के साहसिक कार्य किये और जेल में यातनायें सहन कीं, […]

कविता

ये पतिदेव

उफ्फ्फ यह पतिदेव भी क्या-क्या गज़ब ढाते हैं शादी के कुछ वर्षों में ही यह कितना बदल जाते हैं पहले वर्ष में कहते छोड़ो न काम काज को चंद घडीयां तो आओ मेरे पास बैठ जाओ कुछ सुनो मेरी कुछ तुम अपनी सुनाओ बड़े प्यार से लाया हूँ गजरा इसे अपने बालों में सजाओ कोई […]

कविता

सबक सिखाना जरुरी है

इक आग सी अब सारे दिलों में जलाना जरुरी है इन पाकिस्तानियों को सबक सिखाना जरुरी है दे दी बहुत छूट इन्हें प्यार से बहुत समझा लिया प्यार भरी बातों से बहुत इनको पुचकार लिया रोक बातो के सिलसिलों को अब इनकी जूतम पैजर करना जरुरी है इन पाकिस्तानियो को अब सबक सिखाना जरुरी है […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सृष्टि के समान वेदों की प्राचीनता ईश्वरीय ज्ञान होने का प्रमाण

ओ३म् वेदाध्ययन करते हुए विचार आया है कि संसार की भाषा में समयानुसार परिवर्तन होते रहते हैं। एक भाषा का प्रत्यक्ष व परोक्ष प्रभाव दूसरी भाषा पर, दूसरी का तीसरी व अन्यों पर पड़ता देखा जाता है। हिन्दी में आजकल लोग अंग्रेजी शब्दों की भरमार कर रहे हैं। फिर क्या कारण है कि वेद सृष्टि […]

कविता

वर्ण पिरामिड

सात पंक्तियों की रचना ……. पहली पंक्ति एक वर्ण सातवीं पंक्ति सात वर्ण जी नन्हीं नीड़ में संवर्धक मनु सिखाते तंगी में कुंजन चिड़िया व पिण्डज ~~~ हे ! मन अन्दोरी अवीक्षित न होड़ी बन लाज से बचेगी उर्मियाँ क्या हारेगी ~~~ तू चप्पू चंपला चमकौवल चभोरे नाव छेड़े शशि छवि हिलोरे धारा तन ~~~

उपन्यास अंश

अधूरी कहानी: अध्याय; 28: पुरस्कार वितरण

स्नेहा तथा समीर आॅफिस में थे तभी तभी रूपाली ऑफिस में आयी और उसने स्नेहा को एक कार्ड दिया स्नेहा ने वह कार्ड खोला तो वह कार्ड एक बहुत बड़ी कंपनी में हर साल होने वाले फंग्शन का था और जिसमें चीफ गेस्ट का नाम स्नेहा और रमेश चौधरी था राजेश डिसूजा जो इस कंपनी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इंसानियत इंसान के हाथों कतल होती रही, नफरतों के बीज दुनिया किस कदर बोती रही बैठी रही सरकार बस कानों में डाले ऊंगलियाँ, हैवानियत हंसती रही, मासूमियत मरती रही हम तरसते ही रहे पानी की इक-इक बूँद को, अपने हिस्से की नदी जाने किधर बहती रही बजाई खूब तालियाँ तमाशाईयों की भीड़ ने, घर मेरा […]

कविता

वीरान सी गलियां

दूर तक जहां भी जाती है नजर एक सूना सा मंजर आता है नजर… वीरान सी गलियां है, हर आंगन खाली है उजडे से गुलशन हैं, हैरान सा माली है वीरान सी गलियां…. होली अब रंगों की, बौछार नही करती। अब काली अमावस सी, काली दीवाली है वीरान सी गलियां…. अब खेल के ये मैदान, […]

सामाजिक

शब्द !

शब्द कभी चुभ जाते हैं ,कभी सहला जाते है ,कभी रुला जाते हैं ,कितने शब्द ! शब्दों की एक अपनी विस्तृत दुनियां है शब्दों के अपने अहसास हैं ,ख़ुशी के गम के प्रेम के असंख्य भावनाएं जुड़ी हैं  शब्दों के साथ । जहां भावनाएं होती हैं वहां जीवन होता है पत्थर में तो भावनाएं नहीं […]