लघुकथा

लघुकथा : निर्दोष

चंद्रपाल की पत्नी अपनी छोटी बेटी को लगातार पीट रही थी और मुँह से अपशब्द भी बक रही थी, बेटी रो-रोकर कह रही थी- “अम्मा मैंने नहीं लिया, मैं सच कह रही हूँ। देखो न मैंने कहाँ छुपा रखा है?” इतना सुनते ही उसकी माँ ने दो-चार तमाचे और रसीद दिए जिससे वह तिलमिला गई। माँ ने बोलना […]

गीत/नवगीत

गीत : संतों का अपमान

(काशी के संतो द्वारा गणपति विसर्जन की मांग पर उ प्र शासन के बर्बर लाठी चार्ज पर आक्रोश जताती मेरी ताज़ा रचना) गंगा माता बिलख रही थी, लाचारी के घाटों पर क्रूर लाठियां बरस रही थीं, चन्दन लगे ललाटों पर खाकी, लगता थूक रही थी, संतो के सम्मानों पर यूं लगता था मुहर लगी थी, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल (ये क्या दुनिया बनाई है)

ग़ज़ल (ये क्या दुनिया बनाई है) मेरे मालिक मेरे मौला ये क्या दुनिया बनाई है किसी के पास सब कुछ है मगर बह खा नहीं पाये तेरी दुनियां में कुछ बंदें करते काम क्यों गंदें कि किसी के पास कुछ भी ना, भूखे पेट सो जायें जो सीधे सादे रहतें हैं मुश्किल में क्यों रहतें […]

अन्य लेख

कृषि पर पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता है

भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है, इस परिपेक्ष में देश में कृषि उत्पादकता का स्तर बहुत ही अच्छा होना चाहिए, लेकिन आज देश में बढ़ती जनसंख्या के दौर में उनके लिए खाद्यान्न की आवश्यकतानुसार आपूर्ति सही रूप में सम्भव नहीं हो पा रही है। नये वैज्ञानिक कृषि उपकरणों/उपायों के बावजूद भी अपेक्षित पूर्ति हेतु कृषि उत्पादन […]

कविता

श्राद्ध पक्ष

‘नमन’ सभी दिवंगत आत्माओं को जो वंश में अग्रज हमारे पूर्वज रहे । हमें सदा मनोहर ज्ञान की सीख दी समित्र भाव संग जीने के संस्कार दिए, मानवता और प्रभु भक्ति का मार्ग दिखाया, साथ हमारे अब न रहे । पर अपने प्यार और आशीर्वाद का साया . हम पर वरदहस्त सदा बनाया, , आज […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  जिंदगी से नहीं गिला कोई प्यार में हमनवां मिला कोई जिंदगी शूल का सफर साहिब ये ग़ज़ल है न काफ़िया कोई गौर से देखिये नजर उनकी आज भी जर्द है वफ़ा कोई बिखरती तीरगी घरों में जब मन्दिरों में दिया जला कोई भूल जाती सभी ख़ुशी अपनी माँ से बढ़ कर नहीं खुदा कोई […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रोका हमने दिल दीवाना बोल उठा जल जल के कोई परवाना बोल उठा जर्द किये थे जज्बातों को सीने में गालों पर लाली का आना बोल उठा सो जाते हैं कितने ही भूखे बच्चे कूड़े पर फेंका वो खाना बोल उठा साथ नहीं देते जब तुम तन्हाई में मेरा साथी जाम पुराना बोल उठा थक […]

उपन्यास अंश

अधूरी कहानी: अध्याय-27: पासवर्ड

स्नेहा ने समीर को एक मेल सेन्ड की तथा मेल के साथ ट्रेपर नाम का साॅफटवेयर एड कर दिया तब रूपाली ने पूछा कि ये क्या है तब स्नेहा ने बताया कि ये हैगिंग साॅफटवेयर है जैसे ही समीर मेल खोलेगा तो उसका पासवर्ड हमारे पास मैसेज आ जायेगा रूपाली बोली यू आर ग्रेड स्नेहा […]

संस्मरण

मेरी कहानी 64

ट्रैवल एजैंट के दफ्तर से  निकल कर और कुछ मठाई ले कर मैं गाँव आ गिया लेकिन मैंने माँ को कुछ नहीं बताया। जो खत मैंने लंदन कालज  को डाला था ,उस का जवाब मुझे मिल जाएगा इस की कोई मुझे आशा नहीं थी क्योंकि जो इंडिया में देख रहा था उस के हिसाब से तो […]

लघुकथा

लघुकथा : मनचले

लॉन्ग रूट की बस सर्पीली पहाड़ी सड़क से गुजर रही थी l कंडक्टर की सीटी के साथ ही बस सवारियों को चढ़ाने के लिए एकाएक रुकी l अन्य सवारियों के साथ दो किशोरियां भी बस में चढ़ी l दो मनचले लड़के भी उनका पीछा करते बस में चढ़ गए थे l बस की सभी सीटों […]