गीत/नवगीत

इस प्यार की धरा का

इस प्यार की धरा का, सावन सरस बनों तुम। हर बूंद से निकलता, बस प्रेम रस बनों तुम।। पलकें बिछाऊं अपनी, तेरी डगर में हमदम। हरियाली कर दो तन मन, मुझे प्रेयसी वरो तुम…. हर बूंद से निकलता, बस प्रेम रस बनों तुम…. प्यासा है मन का आंगन, प्यासा है प्रेम उपवन। बन कर बरसता बादल, […]

कविता

जिन्दगी खामोश है, ठहर सी गई है …………………………………. 

जिन्दगी खामोश है ठहर सी गई है, रंगमंच खाली पड़ा है, वक्त यूंही निकल रहा है, मेरी कलम नहीं ठहरी है, उसे बढ़ना है, मुझे सम्भालना है, वक्त यूंही निकल रहा है, जिन्दगी में कई पात्र देखे, उनमें ढलने की भी बहुत कोशिश की मैंनें, वक्त यूंही निकल रहा है, जो चाहा उसे पाने की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आप को रूह से चाहता कौन है पूछते तब भी हो बावफा कौन है इल्म की राह है मुश्किलों का सफर बंदगी में खुदाया, मिटा कौन है । देख के गैर की महफ़िलो में तुझे लोग हैं पूछते, बेवफा कौन है । मतलबी लोग है इस जहाँ के मगर डूबती नाव पर, बैठता कौन है […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

अंदर बाहर आग लगी है घर चौबारे सुलग रहे ये हालात सुधारें कैसे कैसे कोई विलग रहे टुकड़ा-टुकड़ा टूटा भारत टूटी उसकी ताक़त भी जांत-धर्म के झगड़े में क्योंभाई-भाई अलग रहे पहले मुझको फूलों जैसा तेरा सँग जो प्यारा था धीरे-धीरे जाना मैंने तेरा रूख तो न्यारा था मीठी-मीठी बातें तेरी सबको ही फुसलाती थी […]

कविता

चकाचौंध का इंद्रजाल

चकाचौंध का इंद्रजाल लोभी जीभ के खातिर अँधेरी राहों को चुन कर शादी के बंधन का मजाक उड़ा कई पतियों की मोहरों को बिसात पर बिछा काली गोटियों के खाने के काले किरदार निभा सफेद खानों का नकाब ओढ़ शौहरत की सीढ़ियों पर चढ़ चकाचौंध का इंद्रजाल बुन अपनी ही प्रतिरूप बेटी को मार हत्यारिन […]

कविता

मुद्दत बाद

मुद्दत बाद गुजरा हूँ तेरी गली से इल्म है की तुम्हें न देख पाउँगा। फिर भी एक उम्मीद है कि शायद मेरे कदमों की आहट सुन लो। वर्षों बीत गए और आँखों की रौशनी भी कम हो गई। पर तुम आज भी मन की आँखों में सौंदर्य की सलोनी प्रतिमा हो। दरीचे,दरख्त,खिड़कियां वही बस तुम्हारा […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मृतक श्राद्ध विषयक भ्रान्तियां: विचार और समाधान

ओ३म् हिन्दू समाज आज कल अन्धविश्वासों का पर्याय बन गया है। श्राद्ध शब्द को पढ़कर धर्म-कर्म में रूचि न रखने वाला एक अल्प ज्ञानी सामान्य व्यक्ति भी समझता है कि श्राद्ध अवश्य ही श्रद्धा से सम्बन्ध रखता है। जिस प्रकार से देव से देवता शब्द बनता है उसी प्रकार से श्रद्धा से श्राद्ध बनता है। […]

मुक्तक/दोहा

*****राजनीति पर कुछ दोहे*****

पल में मिलते हैं गले, पल में लातम लात। राजनीति के खेल में, हर पल होती घात।। लूट रहे है देश को,पहन शराफत खोल। खण्ड-खण्ड हो जायगा, भारत का भूगोल ।। सबके अपने रंग है,सबके अपने ढंग। कोई महलों में पले,हाल किसी के तंग।। न्याय-व्यवस्था पंगु है, भ्रष्टाचार अपार । लूटन को देखो खड़े, अनगिन […]

स्वास्थ्य

दन्तरक्षा – टूथपेस्ट बनाम दातुन

यों तो डॉक्टर साहब का सुपुत्र पी.एम.टी. की तैयारी कर रहा है, किन्तु एक सप्ताह से दाढ़ के दर्द से परेशान है। डॉक्टर साहब ने कैविटी में सोरेल सीमेन्ट भरवा दी है परन्तु दर्द यथावत है। बच्चे की उम्र मात्र १६ वर्ष है। हमारे पडौसी का लडका बी.एससी. की पढाई कर रहा है किन्तु तीन दिन […]

आत्मकथा

आत्मकथा : एक नज़र पीछे की ओर (कड़ी 46)

दीपावली समारोह श्रीमती जी के आॅपरेशन के बाद जो दीपावली आयी, वह हमने पंचकूला में ही मनाना तय किया। सूरत से मेरे बड़े साढ़ू श्री हरिओम जी अग्रवाल अपनी पत्नी श्रीमती सुमन और बड़े पुत्र मोनू के साथ दीपावली पर पंचकूला आ गये। उनके साथ हमारा त्यौहार अच्छा मन गया। उनका छोटा पुत्र ईशान्त (ईशू) […]