गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चांदनी हमें जलाती रही रात भर
आपकी याद सताती रही रात भर !

दिल मैं नाउम्मीदी सी जलती बुझती
यादों की शमां झिलमिलाती रही रात भर !

तिरी खुशबु से महकता रहा जिस्म मेरा
तिरी तस्वीर को सुलाती रही रात भर !

चाँद तारे छुप गए निशाँ के आँचल में
हवायें मोहब्बत के नग्मे गुनगुनाती रहीं रात भर !

वो आकर भी न आया पास मेरे
दिल की सदायें उसे बुलाती रहीं रात भर !

जिसकी उम्मीद में जीते रहे “आशा” हम
उसकी तड़प हमें जगाती रही रात भर !

— राधा श्रोत्रिय “आशा”

राधा श्रोत्रिय 'आशा'

जन्म स्थान - ग्वालियर शिक्षा - एम.ए.राजनीती शास्त्र, एम.फिल -राजनीती शास्त्र जिवाजी विश्वविध्यालय ग्वालियर निवास स्थान - आ १५- अंकित परिसर,राजहर्ष कोलोनी, कटियार मार्केट,कोलार रोड भोपाल मोबाइल नो. ७८७९२६०६१२ सर्वप्रथमप्रकाशित रचना..रिश्तों की डोर (चलते-चलते) । स्त्री, धूप का टुकडा , दैनिक जनपथ हरियाणा । ..प्रेम -पत्र.-दैनिक अवध लखनऊ । "माँ" - साहित्य समीर दस्तक वार्षिकांक। जन संवेदना पत्रिका हैवानियत का खेल,आशियाना, करुनावती साहित्य धारा ,में प्रकाशित कविता - नया सबेरा. मेघ तुम कब आओगे,इंतजार. तीसरी जंग,साप्ताहिक । १५ जून से नवसंचार समाचार .कॉम. में नियमित । "आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समूह " भोपाल के तत्वावधान में साहित्यिक चर्चा कार्यक्रम में कविता पाठ " नज़रों की ओस," "एक नारी की सीमा रेखा"