करवाचौथ बहाना है

करवाचौथ पर मेरी पत्नी को समर्पित एक कविता :-

करवाचौथ बहाना है,
बस इतना याद दिलाना है,

रात को जब मैं सोती हूँ,
हर स्वप्न तुम्हारा होता है,
उठते ही आँखों के आगे,
ये चेहरा प्यारा होता है,
तुम जब काम पे जाते हो,
दरवाजे तक मैं आती हूँ,
दिन कैसे बीतेगा तुम बिन,
ये सोच के ही डर जाती हूँ,
शब्द नहीं जुड़ पाते हैं,
मैं क्या-क्या कहना चाहती हूँ,
शाम को जल्दी आ जाना,
बस इतना ही कह पाती हूँ,
ना वैलंटाइन विश करती हूँ,
ना रोज़ डे ही मनाती हूँ,
पर तुम्हारी प्रगति की खातिर,
मंदिर में दिया जलाती हूँ,
ना फेसबुक पर खाता है,
ना वाट्सअप्प चलाना आता है,
मुझको तो बस मेरे प्रियतम,
तेरे रंग में रंगना भाता है,
व्रत करूँ तुम्हारे नाम से तो,
ना भूख-प्यास सताए मुझे,
तेरा प्यार ही मेरी शक्ति है,
हर मुश्किल से पार लगाए मुझे,
इस दुनिया की भीड़ में बस,
इक तुम ही अपने हो मेरे,
स्वयं को सौंप दिया था तुम्हें,
जिस घड़ी लिए थे संग फेरे,
मैंने अपना धर्म निभाया है,
तुम एक पत्नीव्रत ही रहना,
मेरे हृदय के मानसरोवर में,
निर्मल जल बनकर बहना,
किसी भी अन्य महिला को,
ना कुत्सित नजर से देखना तुम,
माँ, बहन या पत्नी किसी की हो,
कभी बुरा ना सोचना तुम,
पति-पत्नी का स्नेह बंधन,
समर्पण की बलिहारी है,
हर पत्नी अपने पति से प्रेम
और आदर की अधिकारी है,

करवाचौथ बहाना है,
बस इतना याद दिलाना है,

— भरत मल्होत्रा