Monthly Archives: October 2015



  • करवाचौथ बहाना है

    करवाचौथ बहाना है

    करवाचौथ पर मेरी पत्नी को समर्पित एक कविता :- करवाचौथ बहाना है, बस इतना याद दिलाना है, रात को जब मैं सोती हूँ, हर स्वप्न तुम्हारा होता है, उठते ही आँखों के आगे, ये चेहरा प्यारा...

  • ग़ज़ल

    आग है ख़ूब थोड़ा पानी है ये यहाँ रोज़ की कहानी है ये ही कहने में कट गए दो दिन चार ही दिन की ज़िंदगानी है ख़ुद से करना है क़त्ल ख़ुद को ही और ख़ुद...


  • दोस्त अनमोल होते हैं

    दोस्त अनमोल होते हैं

    दोस्ती अनमोल है दोस्त अनमोल होते हैं दोस्त यादो में, सम्बादो में होते हैं दोस्त गीत ग़ज़ल होते हैं दोस्त न हो जिंदगी सूनी है सारे रंग फीके हैं न होली न दिवाली अच्छी लगती है...


  • पत्नी जी की आरती

    पत्नी जी की आरती

    हे पत्नी तुम ही हो भार्या , तू ही बेटर हाफ घर के संग में करती , पॉकेट भी तू साफ़ द्वार खड़े प्रभु तेरे , सुन लो ये अरदास पतियों के संग होगा ,आखिर कब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सोचते हैं बारहा क्यूँ हम सयाने हो गए हो गए हैं हम नए रिश्ते पुराने हो गए बात क्या है मिन्नतें रोती बहुत हैं आजकल ख़्वाहिशों को मुस्कुराए तो ज़माने हो गए बीनती कूड़ा जो बच्ची...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सभी आप से दिल लगाने लगे हैं मुहब्बत दिखा कर जलाने लगे हैं बसाया तुझे दिल में मूरत बना कर तभी भूलने में जमाने लगे हैं । जरा मुस्कुरा कर के देखा जो तुमने मुहब्बत के...