धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुष्य जीवन की सफलता के लिए वेदों की शरण लेना आवश्यक

ओ३म्   मनुष्य जीवन संसार की सभी जीव योनियों में सर्वश्रेष्ठ है जिसे निर्विवाद रुप से सभी स्वीकार करते हैं। इसी प्रकार वैदिक सिद्धान्त, मान्यताओं व पद्धति के अनुसार व्यतीत मनुष्य जीवन ही सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है। संसार में अनेक जीवन शैलियों व पद्धतियों को मानने वाले लोग हैं। पारसी, बौद्ध, जैन, ईसाई, मुस्लिम व […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये गरज़ की रिश्तेदारियां मेरे शहर की रस्म-ए-आम है, मुफलिसों की कदर नहीं यहां तवंगरों को सलाम है खंजर है हर आस्तीन में और हर निगाह में फरेब है, कोई किसी का नहीं रहा ये मुकाम कैसा मुकाम है ये उलझनें, ये भाग-दौड़, ये मेहनतें, ये परेशानियां, है सब चार दिन की बात फिर आराम […]

कविता

घर-घर दीप जले/गीत

घर घर दीप जले   ज्योति-पर्व आया मनभावन घर-घर दीप जले। रजत हुआ रजनी का आँगन श्यामल गगन तले।   थमे-थमे दिन पंख लगाकर फिर गतिमान हुए। हाथ बढ़ाकर खुशियों ने ऊँचे सोपान छुए।   नष्ट हुआ कष्टों का क्रंदन सुख के सूत्र फले।   हुआ अस्तगत तम अनंत में गम का मेघ छंटा। भक्ति-भाव […]

इतिहास

कलकत्ता, तेरी जिन गलियों से वो मुसाफिर गुजरा था, उनकी मिट्टी से तिलक लगाने जरूर आऊंगा

कोलकाता को मैं हमेशा कलकत्ता ही बोलता हूं। अभी तक मैंने यह शहर सिर्फ अखबार, टीवी, तस्वीरों और इंटरनेट के जरिए ही देखा है, कभी जाने का मौका नहीं मिला। कलकत्ता से सिर्फ बंगाल का ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान का बहुत गहरा रिश्ता है। कभी इसी शहर की स्याही कागज पर उतर कर गीतांजलि […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल : बयान ए दिल

चाँद को पहलू में लेके चाँद से चाँद का दीदार कर लें फलक से बातें करें पुरअसर दिल पे एतबार कर लें ।। कभी तो रुक के देखूँ कुछ वक़्त को गुलज़ार कर लें बेकरार वक़्त के चिलमन को हटा दें दीदार कर लें ।। लम्हें लम्हें मंजर बदला कैसे बैठ फिर से एतबार कर […]

कविता

नकली फूल….

नकली फूल, बनावट की खुशबु का है व्यापार गुलशन की क्यूं फिक्र करे, व्यापारी सत्तादार। होने लगे आदर्श कलंकित, हर दिन बारंबार बिकता है अब झूठ लगाकर, बोली सरे बाजार॥ होने लगा पतन कुछ ज्यादा, वाणी लगी उगलने आग लगा रही उजले दामन पर, नीयत कैसे कैसे दाग। उजले तन और काले मन है, मुश्किल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक स्वास्थ्य

मूक पशु भैंसों की हत्या रोकने पर महर्षि दयानन्द और उदयपुर नरेश महाराणा सज्जन सिंह के बीच वार्तालाप और उसका शुभ परिणाम

ओ३म् स्वामी दयानन्द जी सितम्बर, 1882 में मेवाड़ उदयपुर के महाराजा महाराणा सज्जन सिंह के अतिथि थे। नवरात्र के अवसर पर वहां भैंसों का वध रोकने की एक घटना घटी। इसका वर्णन महर्षि के 10 से अधिक प्रमुख जीवनीकारों ने अपने-अपने ग्रन्थों में किया है। हम यहां मास्टर लक्ष्मण आर्य द्वारा महर्षि दयानन्द के उर्दू […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

शाम तनहा है और सहर तनहा, उम्र अपनी गई गुज़र तनहा छुप गए साये भी अँधेरों में, रात को हो गया शहर तनहा कोई दस्तक ना कोई आहट है, किसको ढूँढे मेरी नज़र तनहा मंजिलों पर पहुंच गए राही, रह गई पीछे रहगुज़र तनहा कभी रहते थे बादशाह जिसमें, आज रोता है वो खंडहर तनहा […]

कविता

जन्म दिन की शुभ कामनाएं,

आदरणीय विजय कुमार सिंघल जी, प्रधान संपादक ‘जय विजय’ को जन्म दिन पर समर्पित, भारत की शान आपने सदा, अपना कर्तव्य निभा बड़ाई है अनंत खुशियों की जीवन में, असीमित बहार सजाई है , कार्तिक की दीवाली सी, शुभ कामनायों की हसीं और रंगीन- ज्योत प्यार का प्रकाश लिए, साहित्य परिवार में जलाई है. हंस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा)

ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा) वक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियें दर्द से ग़मगीन वक़्त यूँ ही गुजर जाता है जीने का नजरिया तो, मालूम है उसी को वस अपना गम भुलाकर जो हमेशा मुस्कराता है अरमानों के सागर में ,छिपे चाहत के मोती को बेगानों की दुनिया में ,कोई अकेला जान पाता […]