Monthly Archives: November 2015



  • कविता  : गांव और शहर  

    कविता : गांव और शहर  

    एक शहर कई गांव हो सकते हैं लेकिन एक गांव शहर नहीं हो सकता गांव में संस्कृत है संस्कृति है शहर सुसज्जित है सज्जनों से, गांव में भूखे नंगे हैं लेकिन कहीं बेहतर हैं शहरी नंगो...






  • सादर शुभकामाएं

    सादर शुभकामाएं

    मित्रों सादर शुभ दिवस, आज युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा दिल्ली में वार्षिक सभा का आयोजन किया गया है जहाँ देश-विदेश से गणमान्य रचनाकारों के सानिध्य में मुझे भी दर्शन का अवसर मिला था पर अपने...

  • बाल कविता : अपनी माटी

    बाल कविता : अपनी माटी

    अपनी माटी अपनी माटी हमें है अपनी जान से प्यारी इसके लिये कुछ भी कर जायेंगे अपनी जान भी दे जायेंगे हम चुप है तो डरपोक न समझो वीर पुरुष हम कहलाते हैं ज्वालामुखी जब फटता...