लघुकथा : संदेह के घेरे

जावित्री की साध थी कि डाक्टर बेटे कि लिए बहू ही डॉक्टर हो और वह साध पूरी भी हो गई । पता लगते ही बधाई देने वालों का तांता लग गया । विवाह के अवसर पर सावित्री बोली –जावित्री तेरे मन की मुराद पूरी हो गई ।

-हाँ दीदी ,कल तो गीत संध्या में बहू का नाच होगा।

-तेरी बहू को यह भी हुनर आता है ।

-हाँ !खाना बनाना जरा कम आता है सो वह मैं सीखा दूँगी। मैं तो अपनी बहू को सर्वगुणसम्पन्न देखना चाहती हूँ ।

बहू का डांस होने पर सब ने भूरि-भूरि प्रशंसा की और सास ने सुना भी दिया –बहू ,परसों जेठ जी के लड़के की शादी है उसमें भी तुम्हें डांस करना है ।

विवाह की भीड़ छंट जाने पर रुनझुन ने चैन की साँस ली । डाक्टर होने के नाते जो दूसरों की साँस बनाए रखती थी आज उसी का दम घुट रहा था। बचपन में कभी कत्थक सीखा था। शौक –शौक में स्कूल में भी डांस कार्यक्रमों में भाग लेती थी परन्तु जीवन के रंगमंच पर उसको इस कदर नाचना पड़ेगा उसने सोचा भी न था। डर था दूसरों के इशारों पर नाचना उसकी नियति न बन जाए । इस डर से छुटकारा पाने के लिए उसने सरकारी अस्पताल में नौकरी की अर्जी दे दी । तकदीर से इंटरव्यू देने भी उसे जल्दी जाना पड़ा । जिस दिन उसे इंटरव्यू देने जाना था उसी दिन डाक्टर पति का जन्मदिन था। पिछले वर्ष से कुछ ज्यादा ही लोगों को निमंत्रित किया गया था जिसका उद्देश्य जन्मदिवस मनाना नहीं अपितु यह दिखाना था कि हमारे घर की बहू ,डॉक्टर होने के साथ –साथ घर के कार्यों और आतिथ्य सत्कार में कितनी प्रवीण है।

बेटे ने दबे स्वर में कहा –मम्मी ,जन्मदिन एक दिन बाद भी मनाया जा सकता है कल तो रुनझुन का इंटरव्यू है।

-अरे इंटरव्यू है तो क्या हुआ ,एक नहीं तो दूसरा। मेरी बहू के लिए तो हजार इंटरव्यू इंतजार करेंगे। जन्मदिन तो वर्ष मेंएक दिन ही आता है ,उसे कैसे टाला जा सकता है!

-घर में इतने नौकर-चाकर हैं काम में कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,परंतु रुनझुन इंटरव्यू देने नहीं गई तो उसको बहुत फर्क पड़ेगा । बेटे ने समझाने की कोशिश की।

-ना बाबा ना !बहू के बिना एक मिनट नहीं चलेगा ,बहुत कर लिया मैंने काम। ले बहू, घर की चाबियाँ और सँभाल इस घर को ।

रुनझुन से कुछ कहते न बना। एक तरफ सास उसके गुण गाते नहीं अघाती थी दूसरी ओर उसे अपनी बीन पर नचाना चाहती थी । क्या वह नाच पाएगी। संदेहों ,सवालों के बीच वह घिरी हुई थी।

परिचय - सुधा भार्गव

जन्म -स्थल -अनूपशहर ,जिला –बुलंदशहर (यू .पी .) शिक्षा --बी ,ए.बी टी (अलीगढ़ ,उरई) प्रौढ़ शिक्षा में विशेष योग्यता ,रेकी हीलर। हिन्दी की विशेष परीक्षाएँ भी उत्तीर्ण की। शिक्षण --बिरला हाई स्कूल कलकत्ता में २२ वर्षों तक हिन्दी भाषा का शिक्षण कार्य |किया शिक्षण काल में समस्यात्मक बच्चों के संपर्क में रहकर उनकी भावात्मक ,शिक्षात्मक उलझनें दूर करने का प्रयास रहा । सेमिनार व वर्कशॉप के द्वारा सुझाव देकर मुश्किलों का हल निकाला । सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत बच्चों की अभिनय काला को निखारा । समय व विषय के अनुसार एकांकी नाटक लिखकर उनके मंचन का प्रयास हुआ । संस्थाएं --दिल्ली -ऋचा लेखिका संघ ,हिन्दी साहित्य सम्मेलन तथा साहित्यिकी (कलकत्ता ) से जुड़ाव । दिल्ली आकाशवाणी रेडियो स्टेशन में बालविभाग व महिला विभाग के जुड़ाव के समय बालकहानियाँ व कविताओं का प्रसारण हुआ । देश विदेश का भ्रमण –राजस्थान ,बंगाल ,दक्षिण भारत ,उत्तरी भारत के अनेक स्थलों के अतिरिक्त सैर हुई –कनाडा ,अमेरिका ,लंदन ,यूरोप ,सिंगापुर ,मलेशिया ,नेपाल आदि –आदि । साहित्य सृजन --- विभिन्न विधाओं पर रचना संसार-कहानी .लघुकथा ,यात्रा संस्मरण .कविता कहानी ,बाल साहित्य आदि । साहित्य संबन्धी संकलनों में तथा पत्रिकाओं में रचना प्रकाशन विशेषकर अहल्या (हैदराबाद)।अनुराग (लखनऊ )साहित्यिकी (कलकत्ता )नन्दन (दिल्ली ) अंतर्जाल पत्रिकाएँ –द्वीप लहरी ,हिन्दी चेतना ,प्रवासी पत्रिका ,लघुकथा डॉट कॉम आदि में सक्रियता । प्रकाशित पुस्तकें— रोशनी की तलाश में --काव्य संग्रह इसमें गीत ,समसामयिक कविताओं ,व्यंग कविताओं का समावेश है ।नारीमंथन संबंधी काव्य भी अछूता नहीं। बालकथा पुस्तकें---कहानियाँ मनोरंजक होने के साथ -साथ प्रेरक स्रोत हैं। चरित्र निर्माण की कसौटी पर खरी उतरती हुई ये बच्चों को अच्छा नागरिक बनाने में सहायक होंगी ऐसा विशवास है । १ अंगूठा चूस २ अहंकारी राजा ३ जितनी चादर उतने पैर 4-मन की रानी छतरी में पानी 5-चाँद सा महल सम्मानित कृति--रोशनी की तलाश में(कविता संग्रह ) सम्मान --डा .कमला रत्नम सम्मान , राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मान पुरस्कार --राष्ट्र निर्माता पुरस्कार (प. बंगाल -१९९६) वर्तमान लेखन का स्वरूप -- बाल साहित्य, लोककथाएँ, लघुकथाएँ लघुकथा संग्रह प्रकाशन हेतु प्रेस में