लघुकथा : नीच

माता पिता के साथ जा रही एक छह सात वर्ष की लड़की का अचानक पांव फिसला और गहरी खाई में जा गिरी। खून में लथपथ बेटी को उन्होने बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला और निकट ही एक घर पर ले गए। घायलावस्था में अचेत लड़की को वहां कुछ लोगों ने प्राथमिक उपचार दिया और उसे होश में ले आए। लड़की ने पीने के लिए पानी मांगा तो पिता ने यह कहते हुए मना कर दिया ’’ये लोग दलित जाति से संबंध रखते हैं और हम अपनी बेटी को नीच के हाथ का पानी नहीं पिला सकते।’’

प्यासातुर घायल पुत्री को देख मां के भीतर का इन्सान जाग उठा और उसने पानी मंगवाकर पुत्री को पिलाते हुए पति से कहा ’’ये लोग समाज में भले ही दलित कहे जाते हों लेकिन नीच नहीं है, वास्तव में नीच तो आप हैं। प्यास से तड़पती अपनी बेटी से जो पानी छीन ले उस से बड़ा नीच भला कौन हो सकता है।’

— अनन्त आलोक

परिचय - अनन्त आलोक

नाम - अनन्त आलोक जन्म - 28 - 10 - 1974 षिक्षा - वाणिज्य स्नातक शिक्षा स्नातक, पी.जी.डी.आए.डी., व्यवसाय - अध्यापन विधाएं - कविता, गीत, ग़़ज़ल, हाइकु बाल कविता, लेख, कहानी, निबन्ध, संस्मरण, लघुकथा, लोक - कथा, मुक्तक एवं संपादन। लेखन माध्यम - हिन्दी, हिमाचली एंव अंग्रेजी। विशेष- हि0प्र0 सिरमौर कला संगम द्वारा सम्मानित पर्वतालोक की उपाधि - विभिन्न शैक्षिक तथा सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनेकों प्रशस्ति पत्र, सम्मान - नौणी विश्वविद्यालय द्वारा सम्मान व प्रशस्ति पत्र - दो वर्ष पत्रकारिता आकाशवाणी से रचनाएं प्रसारित - दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित - काव्य सम्मेलनों में निरंतर भागीदारी - चार दर्जन से अधिक बाल कविताएं, कहानियां विभिन्न बाल पत्रिकाओं में प्रकाशित प्रकाशन - तलाश (काव्य संग्रह) 2011 संपर्क सूत्र - साहित्यालोक, बायरी, डा0 ददाहू, त0 नाहन, जि0 सिरमौर, हि0प्र0 173022 9418740772, 9816642167