Monthly Archives: November 2015

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    प्यार में लाख शिकवा गिला कीजिये मुस्कुराते हुये बस मिला कीजिये । जिंदगी का सफर शूल की है डगर मुस्किलों का जरा सामना कीजिये। प्यार का रोग मुझको लगाया सनम दर्द दिल की मिरे अब दवा...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कभी है ग़म,कभी थोड़ी ख़ुशी है इसी का नाम ही तो ज़िन्दगी है हमें सौगात चाहत की मिली है ये पलकों पे जो थोड़ी-सी नमी है मुखौटे हर तरफ़ दिखते हैं मुझको कहीं दिखता नहीं क्यों...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    उच्श्रृंखल है प्यार तुम्हारा  अच्छा लगता है, मुझ पर हर अधिकार तुम्हारा  अच्छा लगता है. कैद किया है तुमने तो मुझको अपने दिल में, पर ये कारागार तुम्हारा अच्छा लगता है. “ना” भी कहते तो मुझको...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    साधना कर यूँ सुरों की, सब कहें क्या सुर मिला बज उठें सब साज दिल के, आज तू यूँ गुनगुना हाय! दिलबर चुप न बैठो, राज़े-दिल अब खोल दो बज़्मे-उल्फ़त में छिड़ा है, गुफ़्तगूं का सिलसिला...


  • पाठक की सहिष्णुता

    पाठक की सहिष्णुता

    आजकल देश में असहिष्णुता पे खूब बातें हो रही है, किसी को देश अच्छा नहीं लग रहा तो कोई ईराक सीरिया का अखबार पढ़ भारत में डर रहा है, “रक्तपात” की बातें करने वालो को भी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हसरते – दिल को ज़ुबाँ अपनी  बना लूँ तो कहूँ, दिल को थामूँ तो कहूँ, खुद को सम्हालूँ तो कहूँ। उनसे कहना तो बहुत कुछ है मगर क्या करिये, पहले इज़तराब से इस दिल को निकालूँ...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सच सरेआम सताया जा रहा है, झूठ का महल सजाया जा रहा है कल तलक जो कटघरे में खड़े थे उन्हें हाकिम बनाया जा रहा है मिल रही हैं गद्दारों को जागीरें, शहीदों को भुलाया जा...