गीत/नवगीत

गीत (अन्तिम ख़त) | शिव चाहर मयंक

  सरहद से वर्दी संग उसका हर सपना ले जाना है! अन्तिम ख़त साथी का मुझको उसके घर पहुँचाना है!   मेरा क्या हो पता नहीं माँ लेकिन देश सलामत है! इस ख़त को रखना दामन मे मेरी यही अमानत है! छोड चला माँ आँचल तेरा समझ नहीं कुछ आता है! खून से लथ पथ […]

गीत/नवगीत

गीत (आदरणीय कलाम जी को समर्पित) / शिव चाहर मयंक

सूरज,  चाँद,  गगन  से  पहले  याद वही तो आऐगें! मरे  नहीं  वो  अमर  हुऐ  है दिल में साथ निभाऐगें!   संघर्षों से लडना जिसने दुनिया  को सिखालाया था! मेहनत और लगन के आगे मुश्किल को झुँटलाया था! जिसने देश  को दुनिया  में पहचान नई दिलवाई थी! जिसने अपने  बल पर खुद ही अपनी राह बनाई […]

कविता

कविता : एक गुजारिश नववर्ष से

  सुनो नव वर्ष इस तरह से आना जीवन में सबके खुशियां लाना ! खोये रहते जो अंधेरों में हमेशा उनके मन में इक दीप जगाना ! खुशी आ जाए चेहरे पे उनके भूल गये हैं जो मुस्कराना ! उजड़ गया हो चमन जिनका उनकी बगिया को महकाना ! मन में जिनके द्वेष भरा हो […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म सामाजिक

वैदिक धर्म और आंग्ल नववर्ष २०१६

ओ३म्   वर्तमान समय में हमने व हमारे देश ने आंग्ल संवत्सर व वर्ष को अपनाया हुआ है। इस आंग्ल वर्ष का आरम्भ 2015 वर्ष पूर्व ईसा मसीह के जन्म वर्ष व उसके एक वर्ष बाद हुआ था। अनेक लोगों को कई बार इस विषय में भ्रान्ति हो जाती है कि यह आंग्ल संवत्सर ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

  दीन दुनिया ईमान है कोई बाखुदा अहले जान है कोई । चाहतों का दीया न बुझ जाए आज आया तूफ़ान  है कोई । जख्म पे जख्म दे रहा मुझको इस तरह कद्रदान है कोई । इश्क अपना बयां न कर पाया इस कदर बेजुबान है कोई । हार मत मानना मुसीबत में जिंदगी इम्तहान […]

लघुकथा

लघुकथा- आ लौट चले

लघुकथा- आ लौट चले फोन रखते ही पत्नी माथा पकड़ के बैठ गई. विजातीय पति से लव मैरिज के कारण सासससुर ने जाति बाहर होना के पहले ही उन को अपमानित कर घर से बाहर कर दिया. वे सम्पति से बेदखल हो कर वे शहर आ गए थे. तभी से सासससुर से उन का कोई […]

गीत/नवगीत

गीत : हे माँ तुझको मेरा वंदन

रिश्ता है ये सबसे न्यारा, सबसे अनुपम है ये बंधन, ॠणी रहूँगा सदा तुम्हारा, हे माँ तुझको मेरा वंदन, तुमने अपने उदर में मुझको, नौ माह तक संभाला था, कैसे पाल सकेगा कोई, जैसे तूने पाला था, तेरी साँस से साँस जुड़ी थी, और तेरी धड़कन से धड़कन, ॠणी रहूँगा सदा तुम्हारा, हे माँ तुझको […]

संस्मरण

मेरी कहानी 91

हमारा जहाज़ अमृतसर छोड़ चुक्का था और हम बादलों के ऊपर उड़ रहे थे. कुलवंत मुरझाई सी लग रही थी और मेरे कंधे पर सर रख कर आँखें बंद किये हुए सो रही थी. मुझे नहीं पता कि वोह सो रही थी या सोने का नाटक कर रही थी. मुझे पता है कि वोह ऐसे […]

गीत/नवगीत

तुम बिन ये जीवन क्या जीवन…

तुम बिन ये जीवन क्या जीवन, बिखरा सा घर सूना आंगन। हर पल तन्हाई का आलम, उतरा चेहरा डूबा सा मन॥ खामोशी की चादर ओढे, सोया है जैसे हर कोना। जीवन लगता है जैसे हो, बिन चाबी का कोई खिलौना॥ हर सुबहा अलसाई सी है, बीते शाम सिन्दूरी बे मन… हर पल तन्हाई का आलम, […]

कविता

कुछ प्रेम लिख कुछ प्रीत लिख…

कुछ प्रेम लिख कुछ प्रीत लिख अनुराग की नव रीत लिख। इन धडकनों के स्वर के संग मनमीत मन का गीत लिख॥ कुछ झुकते नयनो की अदा कुछ इन लबों की मयकदा। कुछ बिदिंया चमकार लिख कुछ रूप का श्रंगार लिख॥ लिख उडते आंचल को हवा जुल्फों को लिख काली घटा। अंगडाई को बिजली लिखो […]