Monthly Archives: December 2015

  • ये जीवन लघु सरिता सा…

    ये जीवन लघु सरिता सा…

    ये जीवन लघु सरिता सा कभी छलका सा कभी रीता सा। कभी उदगारों के भाव विह्ल कभी सत्य सार्थक गीता सा॥ कभी बाढ वेग सा उद्वेलित कभी प्रेम परायण आव्हेलित। कभी बनकर धारा तीव्र बहे कभी...

  • कौन किसी की पीर सुने..

    कौन किसी की पीर सुने..

    कौन किसी की पीर सुने, सब पत्थर के इंसान यहां। रिश्ते नातें दौलत इनकी, दौलत ही भगवान यहां॥ भाव भावना कौन पूछता, भोग विलास का अपार हुआ। जिसने रखे उसूल सलामत, वो जग में लाचार हुआ॥...




  • “कुण्डलिया”

    “कुण्डलिया”

    सादर सुप्रभात मित्रों, वर्ष 2015 की शानदार विदाई और नव वर्ष का शुभ स्वागतम का समय है। एक कुण्डलिया आप सभी को सादर प्रस्तुत है, हार्दिक बधाई सह……… “कुण्डलिया” नए वर्ष की आरती, सजी हुई है...


  • रिश्तों की मर्यादा

    रिश्तों की मर्यादा

    सावन का महीना था। इंद्रदेव अपने पूरे वेग से बरस रहे थे। सूरज देवता तो जैसे आज निकलना ही भूल गये। हर तरफ काली घटा छायी हुई थी। ऐसे मौसम में सुरभी जल्दी -जल्दी काम निपटा...

  • गीत

    गीत

    चाहे जितना भी समझा लो इसे समझ ना आएगा जब भी मौका मिला फिर वही राग बेसुरा गाएगा कभी ना सुधरेगा ये ना ही अपनी हरकत छोड़ेगा हड्डी देखेगा जब कुत्ता पूँछ उठा कर दौड़ेगा प्यार...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बेटियों को मुझे पढ़ाने दो। और दीपक मुझे जलाने दो। बाग में कम न हो कहीं खुश्बू, कुछ और फूल खिलाने दो। दिल हमारा जवाब दे बैठा, दर्द को और अब ठिकाने दो। दोस्त अब मिरे...