Monthly Archives: December 2015

  • कविता

    कविता

      मैने तो सोचा था वो खत्म हो गए हैं अब मैने तो मार दिया था उनको उनके ही घर मे सरेआम ललकारा था उनकें ही लोगों के सामने खुले शेर की तरह परन्तु ….. मेरा...

  • कविता

    कविता

    ये कैसा मंजर है सृजन का कि कविता की भूमि तलाशते कलमकार को चौंका गयी नीरवता में एक चीख, बरबस बढ़ गये कदम किन्तु ! हो गये नयन विस्मित देख एक अबला की लुटती लाज निर्लज्जता...


  • जीवन पतंग

    जीवन पतंग

    जीवन की पतंग पतंग के मंजे से कटती ऊँगली से बहते रक्त की धार में बचपन की निकल आई यादों के साथ आज हो गए जैसे दो दो हाथ! बचपन कि जिसे बहुत पीछे छोड़ दिया...


  • नवगीत

    नवगीत

    अंदर ही अंदर दम घुटता है बाहर जाने से मन डरता है कोई शिकारी है इंतजार में ये सोच के मन कांप उठता है और डर डर के एक दिन हम मर जाते है…. हम मर...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तीखे मोड़ हों जिसमें वो राह अच्छी नहीं होती, ए मेरे दोस्त बिन माँगी सलाह अच्छी नहीं होती उड़ा देती है छत बस्ती के सब कच्चे मकानों की, बहुत ज्यादा भी तूफानी हवा अच्छी नहीं होती...

  • गीत : बस एक बार आओ न

    गीत : बस एक बार आओ न

    बस एक बार आओ न दिल के तारों को छूकर कुछ गुनगुनाओ न बस एक बार आओ न कागज के सारे पन्नों पर स्याही की बूंदों से कुछ शब्द लिख जाओ न बस एक बार आओ...

  • कविता

    कविता

    चाँद आसमां में है चांदनी छन छन के खिड़की के बंद शीशे से आकर बिस्तर के चादरों पर बिखरी है. किरणें कभी मेरे जिस्म पर फिसलती कभी चादरों की सिलवटों में गुम होतीं कि तभी चाँद...