Monthly Archives: December 2015


  • गुलमोहर!!

    गुलमोहर!!

    कैलाश गुलमोहर की जड़ों में पानी दे रहा था कि तभी बगल बाले घर में रहने बाले सरजू चाचा घर से निकले और कैलाश को देख बोल पड़े …..ओ रे कैलाश जे गुलमोहर में काहे पानी...

  • लघुकथा : इज्जत

    लघुकथा : इज्जत

    नशे में धुत लड़खड़ाते मित्र को सहारा देकर घर छोड़ने आये सुनील ने याद दिलाया, “देखो जगपाल तुम्हें कितनी बार समझाया है, शराब पीना अच्छी आदत नहीं है इससे न केवल तुम्हारा स्वास्थ्य बिगड़ रहा है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जात-मज़हब के सभी पर्दे हटाकर देखो हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई को बराबर देखो लाख तीरथ करो,या पूज के पत्थर देखो न मिलेगा रब, अगर दिल के न भीतर देखो रंग लाती है दुआ क्या,ये पता तुम को चले, कभी...