कुण्डली/छंद

आल्ह छ्न्द

आल्ह छ्न्द[ १६+१५=३१ अंत गाल =२१ ==================================== चलें नहाने गंगा जमुना, ईश्वर का प्यारा वरदान/ संगम तट पे भीड़ देखि के, बुढऊ आज भए परेशान/ लेकर बोरी बिस्तर भागे , जय जय गंग बचावा जान / अइसा भीड़ कबहूं न देखे, विधिना कहाँ करी अस नान /[स्नान] ======================================= राजकिशोर मिश्र ‘राज’ रविवार ३१/०१/२०१६

कविता

“कुण्डलिया”

सादर शुभ दिवस मित्रों, मंच के समस्त प्रबुद्ध जनों को सादर प्रेषित है एक कुण्डलिया……. “कुण्डलिया” छोड़ तुझे जाऊं कहाँ, रे साथी ऋतुराज अब तो पतझड़ आ गया, कैसे कैसे राज कैसे कैसे राज, वाग नहि देता मुर्गा भोर दोपहर होय, मनाऊँ कैसे दुर्गा कह गौतम कविराय, चिरईया दौड़े दौड़ पाए नहीं सराय, कहाँ जाए […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

याज्ञिक परम्परा में महर्षि दयानन्द का अप्रतिम योगदान

उवट, महीधर और सायणाचार्य आदि भाष्यकारों का विचार था कि वेद में वर्णित अग्नि, इन्द्र, वरुण, मित्र आदि कल्पित स्वर्ग में रहने वाले देवता हैं। ये देवता पृथ्वी पर दिखाई देने वाले अग्नि, वायु और जलादि पदार्थों का और आकाश में दिखाई देने वाले सूर्य, चन्द्रमा और उषा आदि के अधिष्ठात्री देवता माना जाते हैं। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो मतिभ्रमित हैं, उनके लिये : सिर्फ तेरा ही  नहीं है  ज़िन्दगी  पर एख्तियार, और भी  कुछ लोग  इसमें हैं  बराबर के शुमार। ज़िन्दगी  के  फैसले  होते   अहम  हैं,  इसलिये, इनको लेते वक्त लाजिम है कि हो सबसे विचार। ज़िदंगी  तेरी   सही,  लेकिन   फ़कत  तेरी  नहीं, कर्ज़ इस पे कितने लोगों का […]

कविता

हवस का पात्र दलित ही क्यों !!

सुन ए मेरे मुल्क तेरा दलित ही दया का पात्र क्यों….. संसद की चौखट पर पुजारी की दुत्कार का पात्र दलित ही क्यों…… अय्यासी की चौध पर जमींदार के कोप का पात्र दलित ही क्यों….. जिस्म के रंग काम के ढंग में अछूत का पात्र दलित ही क्यों फूलन और रमावती में बलात्कार का पात्र […]

राजनीति

आरक्षण पर यक्षदेव की चिन्ता

महाभारत वर्णित जलाशय के पास से गुजरते हुए मेरे भीतर अचानक धर्मराज युद्धिष्ठिर की आत्मा बरबस घुस गई I यक्ष महाराज ने धर्मराज युद्धिष्ठिर से पुछा – भारत में आरक्षण के विषय में तुम्हारा चिन्तन क्या कहता है ? इसे समाप्त किया जाना चाहिए अथवा नहीं ? युद्धिष्ठिर – मेरी दृष्टि में सबसे पहले तो […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

स्वामी दयानन्द प्राचीन ऋषियों की परम्परा वाले सच्चे ऋषि, संसार के सर्वोच्च गुरु एवं अपूर्व वेद-धर्म प्रचारक हैं

ओ३म् हमारे लेख के शीर्षक से आर्यसमाज के अनुयायी तो प्रायः सभी सहमत होंगे परन्तु इतर बन्धु इस तथ्य को स्वीकार करने में संकोच कर सकते हैं। अतः अपने ऐसे बन्धुओं से हम प्रश्न करते हैं कि वह महर्षि दयानन्द से अधिक प्रतिभावान व योग्य ऋषि का नाम बतायें? दूसरा प्रश्न यह है कि महर्षि […]

गीतिका/ग़ज़ल

पंखुड़ी गुलाब

एक प्रयास .. मत कभी भूलो का हिसाब रख दिल में एक पंखुड़ी गुलाब रख || खुश रहना है तो, बस जिंदगी को बनाकर खुली सी किताब रख || फूल भले न भेज खत में मुझे पर नज़रों से तो जवाब रख || नज़र न लगे तुझे जमाने की हसीं चेहरे पर तू नकाब रख […]

गीतिका/ग़ज़ल

है जिंदगी

एक प्रयास …. अंधेरों पर उजियारे का फरमान है जिंदगी रखती कितने खूबसूरत अरमान है जिंदगी।। समेटना हमें बिखरी जहाँ भर की खुशियाँ सच मानो तो सुखो की ही खान है जिंदगी।। जिन्होंने सुनहरा जहाँ हमको दिखाया ऐसे मात पिता का दिया हुआ वरदान है ज़िन्दगी।। जगत में आये है मानव जन्म लेकर फिर पुनीत […]

राजनीति

मालदा का सच और सियासत

पश्चिम बंगाल का मालदा कभी आम के लिए मशहूर हुआ करता था. वहां बड़े पैमाने पर चावल की खेती की जाती थी. लेकिन अब इस मालदा की तस्वीर बदल गई है. अब यहां अपराधियों और माफियायाओं का बोलबाला है. अब यहां बात-बात पर हिंसा होती है. मालदा हिंसा पर आज तक(न्यूज चैनेल) ने तहकीकात की […]