Monthly Archives: January 2016

  • आल्ह छ्न्द

    आल्ह छ्न्द

    आल्ह छ्न्द[ १६+१५=३१ अंत गाल =२१ ==================================== चलें नहाने गंगा जमुना, ईश्वर का प्यारा वरदान/ संगम तट पे भीड़ देखि के, बुढऊ आज भए परेशान/ लेकर बोरी बिस्तर भागे , जय जय गंग बचावा जान /...

  • “कुण्डलिया”

    “कुण्डलिया”

    सादर शुभ दिवस मित्रों, मंच के समस्त प्रबुद्ध जनों को सादर प्रेषित है एक कुण्डलिया……. “कुण्डलिया” छोड़ तुझे जाऊं कहाँ, रे साथी ऋतुराज अब तो पतझड़ आ गया, कैसे कैसे राज कैसे कैसे राज, वाग नहि...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जो मतिभ्रमित हैं, उनके लिये : सिर्फ तेरा ही  नहीं है  ज़िन्दगी  पर एख्तियार, और भी  कुछ लोग  इसमें हैं  बराबर के शुमार। ज़िन्दगी  के  फैसले  होते   अहम  हैं,  इसलिये, इनको लेते वक्त लाजिम है...

  • हवस का पात्र दलित ही क्यों !!

    हवस का पात्र दलित ही क्यों !!

    सुन ए मेरे मुल्क तेरा दलित ही दया का पात्र क्यों….. संसद की चौखट पर पुजारी की दुत्कार का पात्र दलित ही क्यों…… अय्यासी की चौध पर जमींदार के कोप का पात्र दलित ही क्यों….. जिस्म...



  • पंखुड़ी गुलाब

    पंखुड़ी गुलाब

    एक प्रयास .. मत कभी भूलो का हिसाब रख दिल में एक पंखुड़ी गुलाब रख || खुश रहना है तो, बस जिंदगी को बनाकर खुली सी किताब रख || फूल भले न भेज खत में मुझे...

  • है जिंदगी

    है जिंदगी

    एक प्रयास …. अंधेरों पर उजियारे का फरमान है जिंदगी रखती कितने खूबसूरत अरमान है जिंदगी।। समेटना हमें बिखरी जहाँ भर की खुशियाँ सच मानो तो सुखो की ही खान है जिंदगी।। जिन्होंने सुनहरा जहाँ हमको...

  • मालदा का सच और सियासत

    मालदा का सच और सियासत

    पश्चिम बंगाल का मालदा कभी आम के लिए मशहूर हुआ करता था. वहां बड़े पैमाने पर चावल की खेती की जाती थी. लेकिन अब इस मालदा की तस्वीर बदल गई है. अब यहां अपराधियों और माफियायाओं...