कविता

“कुण्डलिया”

सादर शुभ दिवस प्रिय मित्रों, एक कुण्डलिया छंद आप सभी को सादर निवेदित है इस बार मौनी अमावस्या दिन सोमवार को है जिसका एक अलग ही महात्म्य है अतःइस पावन पर्व को मनन करते हुए यह रचना आप सभी को सादर प्रस्तुत है । प्रयाग संगम में आप भी हमारे साथ माँ गंगा जी में […]

गीतिका/ग़ज़ल

कविता सिंह की ग़ज़ल

तुम्हारे प्यार की तासीर में बेचैन मेरा दिल, तुम्हे पाने की हर तदबीर में बेचैन मेरा दिल। अधूरी ख़्वाहिशें मेरी अधूरे ख़्वाब हैं मेरे, अधूरे ख़्वाब की तामीर में बेचैन मेरा दिल। अकेला सा खड़ा बरगद झुकी फैली हुई शाखें, अकेलेपन की इस तक़दीर में बेचैन मेरा दिल। बड़े बेचैन हैं अब लोग टूटी अब […]

राजनीति

महिला अधिकारों के नाम पर महातमाशा

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में भगवान शनि महाराज का पवित्र तीर्थ शनि शिंगणापुर है। जोकि षनि महाराज का अत्यंत लोकप्रिय पवित्र धार्मिक तीर्थस्थल है। यह एक ऐसा शनि मंदिर हैं जहां पर खुले में पूजा होती है। इस पवित्र मंदिर में विगत चार सौ वर्षों से भी अधिक समय से महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।यहां […]

राजनीति

यक्ष प्रश्न

स्वप्न में महाभारत वर्णित जलाशय के पास से गुजरते हुए मेरे भीतर अचानक धर्मराज युद्धिष्ठिर की आत्मा बरबस घुस गई I यक्ष महाराज ने धर्मराज युद्धिष्ठिर से पुछा – भारत के प्रधानमंत्री मोदीजी को अगला चुनाव जीतने के लिए क्या क्या करना चाहिए ? युद्धिष्ठिर – मेरी दृष्टि में सबसे पहले तो सभी चीजों के […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेद सार्वभौमिक मानव धर्म के अधिकारिक प्रतिनिधि व आदिस्रोत

ओ३म् संसार के सभी मनुष्यों वा स्त्री-पुरुषों पर ध्यान केन्द्रित करें तो यह सभी एक बहुत ही बुद्धिमान व सर्वव्यापी कलाकार की रचनायें अनुभव होती हैं। संसार भर में सभी मनुष्य की दो आंखे, दो कान, नाक, मुंह, गला, शिर, वक्ष, उदर, कटि व पैर प्रायः एक समान ही हैं। सभी मनुष्यों का कर्तव्य है […]

लघुकथा

रंग-ढंग

आज फेसबुक पुरानी यादों को ताज़ा कर रहा था | अचानक चेतन को वे ,तस्वीरें दिखी जो उसने पांच साल पहले डाली थी | जिन्हे वह भूल ही गया था | अब ऐसी तस्वीरों की जरूरत ही कहाँ थी उसे | कभी समाजसेवा का उस पर बुखार चढ़ा था, वह भी ईमानदारी से | माँ […]

गीत/नवगीत

गीत : आय-फ़ोन ये मेरा बिलकुल तुम-सा लगता है

मुझको यह निर्जीव बहुत आदम-सा लगता है. आय-फ़ोन ये मेरा बिलकुल तुम-सा लगता है. ये आसाँ है इतना, समझे बच्चा-बच्चा बेहतर. कैसे दुनिया सिमटी देखो एक फ़ोन के भीतर. प्रिय के जैसा फोन, फोन प्रियतम-सा लगता है आय-फ़ोन ये मेरा बिलकुल तुम-सा लगता है. मीठी यादें क़ैद करे सब गीत सुधा बरसाए. तुम जैसा ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

“गजल”

सादर मंगल दिवस प्रिय मित्रों, एक गजल आप सभी को प्रस्तुत करता हूँ.……. “गजल” रे स्वार्थ तुझपर इत्मीनान हो गया जब मेरा ही नाम मेहमान हो गया उबलती हुई चाय नमकीन संग आई तो यादों का सच बेजूबान हो गया॥ हिल गए हाथ जलने लगी उँगलियाँ तो दो बूंद छलका गहरा निशान हो गया॥ रुध […]

गीत/नवगीत

कोई कुछ भी कहे उसे कहने दो

तेरी बातें वो, मुलाकाते वो, तेरे वादों की हसीं रातें वो अपने पलकों की छाँव में रहने दो कोई कुछ भी कहे उसे कहने दो कोई कुछ भी कहे उसे कहने दो, मुझे जीना नहीं, तेरे बिना बस मरना है अब तो तेरे बिना, मुझे जीना नहीं, तेरे बिना, बस मरना है अब तो तेरे […]

कविता पद्य साहित्य

~निष्कपट-निष्कलंक~

लड़की ! निष्कपट-निष्कलंक थी गन्दी लड़की! हाँ बदनाम कर  दी गयी थी! इसी नाम से गाँव के ही काका ताऊओ द्वारा | गन्दी फोटो उसने नहीं बांटी थी बल्कि गाँव के ही कुछ मनचले युवकों द्वारा उतार ली गयी थी चुपके से तालाब पर नहाते ! कपड़े बदलते ! वह तो मासूम सी लड़की थी […]