Monthly Archives: January 2016

  • कविता : चुनौती

    कविता : चुनौती

    आज हुई मुझे सत्य की पहचान ज्ञान हुआ मुझे पुरुषार्थ का मुक्ति का प्रकाश का। पहचान गयी मैं मिथ्या भ्रम को नियति को अन्धकार को। आज मैं दे रही चुनौती उस भ्रम को जिसको मैंने किया...


  • नव वर्ष 2016

    नव वर्ष 2016

    नव वर्ष हमारा ऐसा हो— जीवन का हर पल सुखदायी हो, हर घर आँगन खुशियां छाईं हों , ममता का आँचल फैला हो, घर में बहारों का मेला हो, हर बच्चा फूल के जैसा हो— नव...

  • नया साल

    नया साल

      ये अलसाई आँखों में सपने सजाकर, नया साल आया, नया साल आया कि माज़ी के हर दर्दो-ग़म को भुलाकर, नया साल आया, नया साल आया कि शबनम से धरती नहाई हुई है उमंगों की ख़ुश्बू...

  • ***************झील***************

    ***************झील***************

    झील ऊपर से दिखती कितनी शांत पर क्या वाकई है वो इतनी शांत, कितने अक्स कितनी परछाईयां कितनी ज़िन्दगी कितनी सच्चाइयाँ, छुपाये अपने सीने में मौन सोच रही है अपना है कौन ? रोज़ बनता बिगड़ते...

  • ~~सब तन कपड़ा ~~

    ~~सब तन कपड़ा ~~

    ‘एक तो घर में जगह नहीं उप्पर से नये कपड़े चाहिए पर पुराने किसी को देने को कहो तो मुहं बनता | ‘ भुनभुनाते हुए थैले सहेजती | पुराने थैले को खोल देखती फिर छाँट कर...