Monthly Archives: February 2016

  • विदाई

    विदाई

    आज सुबह से दिल बार बार कह रहा है गुजरे हुये लम्हों पर इतबार कर रहा है बीत गया एक बचपन आँखों के सामने बेटी की डोली है आँसू विचार कर रहा है॥ गत कुछ साल...




  • लघुकथा : बेटी

    लघुकथा : बेटी

    आज शर्मा जी के घर में बड़ी रौनक थी, उनकी एकलौती बेटी ममता की शादी जो थी. बहुत से मेहमानों से घर भरा हुआ था, दरवाजे पर शहनाई बज रही थी, खुशियों का दौर था. शर्मा जी...

  • फिर आई है हिचकी

    फिर आई है हिचकी

    स्त्री हिचकियाँ की सखी साथ फेरो का सकल्प दुःख सुख की साथी एकाकीपन खटकता परछाई नापता सूरज पहचान वाली आवाजों में खोजता मुझे दी जाने वाली तुम्हारी जानी पहचानी पुकार आँगन -मोहल्ले में सुनापन विलाप के...

  • रायचंद

    रायचंद

    हम सब को दूसरों को राय देने की बहुत बुरी आदत है। शायद ही कोई ऐसा हो जिसने दूसरों को राय न दी हो। “तुम्हें ऐसा नहीं वैसा करना चाहिए था।” या “मैं तुम्हारी जगह होता...


  • मेरी कहानी 108

    वुल्वरहैम्पटन तो मेरे लिए घर जैसा ही था। पहले ही दिन मुझे ड्राइविंग पर लगा दिया गिया। रोज़ रोज़ मुझे नए नए कंडक्टर मिलते और मज़े से काम करते। आइरीन रिटायर हो गई थी। पार्क लेंन...