आत्मकथाएं

उपहार

प्रिय सखी कुलवंत जी, आपको वसंत पंचमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. पेशे खिदमत है आपके लिए वसंत पंचमी का सुहाना उपहार, गुरमैल भाई की आत्मकथा का तीसरा भाग, मेरी कहानी-3. गुरमैल भाई को केसर वाले नारियल के लड्डू खिलाइएगा और हमें भी रेसिपी लिख भेजिएगा-

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

4 thoughts on “उपहार

  1. हा हा !इस वक्त तो मुझे भारत की बसंत रितु का मज़ा लेना चाहिए था .

    1. प्रिय गुरमैल भाई जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है.

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