Monthly Archives: February 2016

  • लघुकथा : नई सड़क

    लघुकथा : नई सड़क

    उस नई कॉलोनी में सीमेंटेड  सड़क बन गई  थी। बहुत दिनों बाद मांग पूरी होने से लोग बेहद खुश थे। बच्चों और युवाओं को हिदायत दी गई थी कि जब तक सड़क सूख न जाए, तब...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मासूम से ये बच्चे, खेले हैं गोलियों से समझे न भूखा बचपन, सपने हैं रोटियों से पर्वत की पीर पूछो, उस बावली घटा से कुहरे में जा छिपा है, डरता है बिजलियों से सरहद पे बेटा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    निगाहों से क्या क्या किये जा रहे हो क़यामत हैं आंखें ग़ज़ब ढा रहे हो अगर मान जाओ तो पूरे मैं कर दूँ ये रेशम से सपने बुने जा रहे हो मोहब्बत का जादू गज़ब ढा...

  • गीत

    गीत

    कोई अमीर है, कोई गरीब है बस अपना अपना नसीब है मुलाकात अपनी ना हो सकी तू भी फासलों पे कुछ रहे मैं भी देखूँ दूर दूर से यहाँ कौन किसके करीब है बस अपना अपना...


  • वक्त

    वक्त

    वक्त ने कब ज़िन्दगी का साथ दिया है , हमेशा आगे ही चलता जाता है ! ज़िन्दगी वक्त की परछाई सी नजर आती है ! वक्त बहुत बेरहम है अपनी परछाई का भी साथ छोड़ जाता...



  • लघुकथा : माँ

    लघुकथा : माँ

    मैंने रेड सिग्नल पर अपनी स्कूटर रोकी . ये सिग्नल सरकारी हॉस्पिटल के पास था . उस जगह हमेशा बहुत भीड़ रहती थी. मरीज , बीमार, उनके रिश्तेदार और भी हर किस्म के लोगों की भीड़...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वक़्त,आँसू ,शायरी, ग़म, मयक़दा कुछ भी नहीं। दर्द जो तुमने दिया उसकी दवा कुछ भी नहीं। एक पत्ता आ गया उड़ कर हवा के साथ में। और पतझड़ के सिवा उसमें लिखा कुछ भी नहीं। भूख...