Monthly Archives: February 2016


  • हिरनी

    हिरनी

    एक दिन एक हिरनी जंगल में अपने झुंड से अचानक बिछड़ जाती है। घबराई हुई, डरी हुई, बेतहासा दौड़ते-दौड़ते वह नन्हीं हिरनी जंगल के उस छोर पर आ खड़ी होती है जहां से मनुष्यों की बस्ती...

  • मन की व्यथा

    मन की व्यथा

    ब्यथा अपने मन की बताऊ तो किसे बताती भी हू तो बताकर क्या करू आज के इस दौर मे उलझन ही भरा जगत मे उलझन को सुलझाने मे मदद गार किसे बनाऊ हर मोड पर बेखौख...


  • किसान

    किसान

    वह देश सदा धन्य है जो कृषि प्रधान है वह सदा महान है मनुष्य जो किसान है कठिन श्रम साधता पूर्ण सेवा भाव से न चिलचिलाती धूप से न वर्षा की बूदों से किसी से उसे...


  • कविता : चाँद और बादल

    कविता : चाँद और बादल

    धुंध की चादर पसारे धरा के रूप को सभाले धूप हो गई है गुलाबी मौसम अंगराई मारे बादल श्वेत परिधान पहने चाँद ओट से झाँके देखता जमीं के नजारे मुझ पर डोरे डाले शाम हो जाये...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      धरा   है  घूर्णन  से  त्रस्त,  नभ   विषणन  में  डूबा  है दशा  पर  जग  की, ये  ब्रह्माण्ड  ही  चिंतन  में डूबा है हर इक शय  स्वार्थ  में आकंठ  इस  उपवन में डूबी है कली...

  • कविता : कूटनीति

    कविता : कूटनीति

    दफ्तर के ऑफिसर ने दिवाली के दिन एक कर्मचारी की रिश्वत को लौटा दिया ये देख ऑफिसर की बीवी का मिजाज बिगड़ गया बोली-“आज के दिन लक्ष्मी जी स्वयं घर पधारी थी और आपने उसे विदा...