गीत/नवगीत

व्यंग्य गीत- ये कैसा है सम्मान बंधु

ये कैसा है सम्मान बंधु ये कैसा है सम्मान बंधु. हमको ही सारे खर्चों का करना होगा भुगतान बंधु. आने-जाने, रहने-खाने का खर्च वहन करना होगा. पंजीकृत नाम कराना है इस हेतु शुल्क भरना होगा. कुछ खर्चे होंगे आकस्मिक उनका भी है अनुमान बंधु. अपने ही खर्चे पर अपना हम करवायें गुणगान बंधु. मिलना है […]

कविता

छोटा सा दीपक

छोटा सा दीपक हूँ, कहते हैं घर का चिराग़ मुझसे ही जलती है, घर के उम्मीदों की आग   नन्हीं सी है लौ मेरी लेकिन हैं आशाऐं ढेर रहें जो आशाऐं अधूरी या लगती थोड़ी देर मुझे कोसने लगते हैं मुझे लेते हैं घेर बुझा मुझे देते हैं, जब जाता है सूरज जाग छोटा सा […]