Monthly Archives: March 2016

  • उत्सव

    उत्सव

    हमारे हृदय का प्रेम ही इन पाँखुरियों में बसता है मधु बनकर छलकता अंदर सुगंध बनकर महकता है… कहीं सरसों की स्वर्णिम आभा कहीं गेहूं की बालियां कहीं बौर से लदे आम्र वृक्ष तो कहीं चुनरियाँ...

  • “चइता गीत”

    “चइता गीत”

      “चइता- गीत सखी मन साधि पुरइबे हो रामा, चइत पिया अइहें ननद जेठानी के ताना मेंहणा नाहीं पिया भेद बतईबे हो रामा। चइत पिया अइहें….. अनिवन बरन जेवनार बनईबे, सोनवा की थाल जिमइबे हो रामा॥...



  • कविता : प्रेम

    कविता : प्रेम

    मुझे प्रेम नहीं करना था तुमसे प्रेम सीमित कर देता था अधिकार तुम पर.. लज्जा से बना देता था लचीला मुझे.. नवयौवना बना तुम्हे जी लेने से.. रोक दिया करता था मुझे तो वात्सल्यमयी स्नेह से...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जिसका सूरज तू हो ऐसी सहर की क्या बात है, साथ तेरे गुज़रे जो उस सफर की क्या बात है जीता है अपने लिए हर कोई इस संसार में, गैर की खातिर जिए उस शख्स की...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बारिश जैसा जुनून तेरी मोहब्बत में चाहिये मौसम की तरह बदलकर हमें यूं न सताईये मिजाजे इश्क बहक रहा तेरे दीदार की खातिर इक बार ही सही हमें अक्स दिखा जाइये रह जायेंगे हम तन्हा तेरी...

  • “दोहा”

    “दोहा”

      “दोहा” विक्रम संवत वर्ष पर, वर्षाभिनंदन भाय शुक्ल प्रतिपदा चैत्र से, माँ वंदन शोभाय॥ नवरात्रि श्रद्धा सुमन, कंकू चंदन छाय जय हो रामनवमी की, दशरथ नंदन राय॥ महातम मिश्र (गौतम)