गीत/नवगीत

उत्सव

हमारे हृदय का प्रेम ही इन पाँखुरियों में बसता है मधु बनकर छलकता अंदर सुगंध बनकर महकता है… कहीं सरसों की स्वर्णिम आभा कहीं गेहूं की बालियां कहीं बौर से लदे आम्र वृक्ष तो कहीं चुनरियाँ धानियां प्रकृति की इस छटा से ही जीवन में श्रृंगार उतरता है हमारे हृदय का प्रेम ही…… गुन-गुन करते […]

गीत/नवगीत

“चइता गीत”

  “चइता- गीत सखी मन साधि पुरइबे हो रामा, चइत पिया अइहें ननद जेठानी के ताना मेंहणा नाहीं पिया भेद बतईबे हो रामा। चइत पिया अइहें….. अनिवन बरन जेवनार बनईबे, सोनवा की थाल जिमइबे हो रामा॥ चइत पिया अईहें…… पनवा गिलौरी लवंग इलायची बिरवा इतर लगइबे हो रामा॥ चइत पिया अईहें…… सोरहों शृंगार साधि सेजिया […]

गीत/नवगीत

गीत – दिन तो अब बीते

अच्छा हार मान ली हमने लो तुम ही जीते. किसी तरह से मनमुटाव के दिन तो अब बीते. किसने क्या ग़लती की, कोई बहस नहीं इस पर. तुमको जब माना है अपना दोष मढ़ें किस पर. कब तक अश्क बहाती आँखें कब तक हम पीते. किसी तरह से मनमुटाव के दिन तो अब बीते. तुमसे […]

कविता

अपने स्वाभाव में जियो

न किसी के अभाव भाव में जियों,  न किसी के प्रभाव में जियो,   ज़िन्दगी में जीना है तो,  बस अपने स्वाभाव में जियो,   नक़ल करोगे किसी की तो, तुम  नकलची कहलाओगे,    किसी की डगर पे चलोगे तो,   बस राहगीर रह जाओगे,    सबका जीवन अनुसरणीय  नहीं होता,  सबका जीना अनुकरणीय  नहीं […]

कविता

कविता : प्रेम

मुझे प्रेम नहीं करना था तुमसे प्रेम सीमित कर देता था अधिकार तुम पर.. लज्जा से बना देता था लचीला मुझे.. नवयौवना बना तुम्हे जी लेने से.. रोक दिया करता था मुझे तो वात्सल्यमयी स्नेह से बन्ध तुम्हारी कोमलता को छूना भर था तुम्हारे पैरो के छाले अपनी साड़ी के छोर से साफ़ कर मल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिसका सूरज तू हो ऐसी सहर की क्या बात है, साथ तेरे गुज़रे जो उस सफर की क्या बात है जीता है अपने लिए हर कोई इस संसार में, गैर की खातिर जिए उस शख्स की क्या बात है मैं था तुम थे दरमियाँ थीं बोलती खामोशियाँ, एक पल के उस दीदार-ए-यार की क्या बात […]

संस्मरण

मेरी कहानी 117

सुरिंदर की सगाई सतपाल से हो गई थी। सतपाल अच्छा लड़का था लेकिन उस का डैडी मगरूर किसम का आदमी था। अपने आप को वोह बहुत ही हुशिआर समझता था और उन की बातें ऐसी होती थी कि लड़के का बाप होने के कारण रौब रखना उस का हक्क था, वोह डायबेटिक था लेकिन शराब […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बारिश जैसा जुनून तेरी मोहब्बत में चाहिये मौसम की तरह बदलकर हमें यूं न सताईये मिजाजे इश्क बहक रहा तेरे दीदार की खातिर इक बार ही सही हमें अक्स दिखा जाइये रह जायेंगे हम तन्हा तेरी रुख्सती के बाद इस कदर हमारी चाहत  को न आजमाईये माना कि बहकना इश्क में आसां नहीं होता पर […]

कविता

“दोहा”

  “दोहा” विक्रम संवत वर्ष पर, वर्षाभिनंदन भाय शुक्ल प्रतिपदा चैत्र से, माँ वंदन शोभाय॥ नवरात्रि श्रद्धा सुमन, कंकू चंदन छाय जय हो रामनवमी की, दशरथ नंदन राय॥ महातम मिश्र (गौतम)

राजनीति

कांग्रेस लगातार बेनकाब होती जा रही है

विगत दिनों देश की राजनीति में कुछ ऐसी बयानबाजी हो रही है जिसके कारण अब कांग्रेस बेनकाब होती जा रही है तथा यह भी तय होता जा रहा है कि यह कांग्रेस वह कांग्रेस नहीं रह गयी है जिसमें कभी मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय और सरदार वल्लभभाई पटेल सरीखे राष्ट्रवादी और देशभक्त नेता […]