कविता

कुंडलिया

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शुक्रवार ” चित्र अभिव्यक्ति आयोजन ”( 18.3.2016) ♧♧

देखता बादल को है, नित सोचता किसान
सीढ़ी होती स्वर्ग की, करता एक विधान
करता एक विधान, दौड़ के उसपर चढ़ता
करता तुझमे छेद, खेत का पानी बढ़ता
कह गौतम कविराय, हाथ से लक्ष्य भेदता
तुमहि देत बतलाय, सुनहरी फसल देखता।।

महातम मिश्र (गौतम)

*महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ

2 thoughts on “कुंडलिया

  • विजय कुमार सिंघल

    उत्तम चित्र अभिव्यक्ति !

    • महातम मिश्र

      सादर धन्यवाद आदरणीय विजय सर जी

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