कांग्रेस लगातार बेनकाब होती जा रही है

विगत दिनों देश की राजनीति में कुछ ऐसी बयानबाजी हो रही है जिसके कारण अब कांग्रेस बेनकाब होती जा रही है तथा यह भी तय होता जा रहा है कि यह कांग्रेस वह कांग्रेस नहीं रह गयी है जिसमें कभी मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय और सरदार वल्लभभाई पटेल सरीखे राष्ट्रवादी और देशभक्त नेता हुआ करते थे। आज की सोनिया-राहुल की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी अब पूरी तरह से चर्च प्रेरित व अपनी राजनीति को बचाने को लिए अंतिम लड़ाई लड़ते-लड़ते देशद्रोहियों की गोद में जाकर बैठ गयी है।

मुस्लिम तुष्टीकरण को वापस पाने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस को अब ‘भारतमाता की जय’ बोलना अच्छा नहीं लग रहा है। साथ ही अपनी पत्नी सुनंदा की हत्या में फंसे हुए शशि थरूर को अब भारत विरोधी नारेबाजी करने वाले कन्हैया कुमार में भगत सिंह जैसी छवि दिखलायी पड़ने लग गयी है। आज पीएम मोदी व भाजपा, संघ विरोधी लोगों के लिए कन्हैया कुमार और प्रशांत किशोर जैसे लोग नये भगवान लगने लग गये हैं जोकि उनके बिगडे हुए राजनैतिक कैरियर को संवार सकते हैं।

विगत दिनों वामपंथी दलों ने बंगाल के विधानसभा चुनावों में कन्हैया कुमार से चुनाव प्रचार करवाने का निर्णय लिया है वहीं दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल कन्हैया को पंजाब में भुनाना चाह रहे हैं। इसी बीच शशि थरूर ने कन्हैया की तुलना भगत सिंह से करके अपनी बौद्धिक हैसियत जगजाहिर कर दी है। आज की तारीख में सोशल मीडिया में शशि थरूर अभी तक लोगों के निशाने पर बने हुए हैं।

अभी हाल ही में हैदराबाद से सांसद ओबैसी ने मीडिया में चर्चा में आने के लिए बयान दे डाला कि ”कोई उनसे भारत माता की जय नहीं बुलवा सकता है।“ ओवेसी के बयान पर अभी तक हंगामा बरपा है। उनके समर्थन में अब तक जम्मू कश्मीर से अब्दुल्ला परिवार तो आया ही है साथ ही अब कांग्रेस के प्रमोद तिवारी भी कह रहे हैं कि भारतमाता की जय बोलने के लिए कोई जबर्दस्ती नहीं की जा सकती है। यह कांग्रेस का असली घिनौना चेहरा सामने आ रहा है। इस प्रकार के बयानों व देशद्रोही ताकतों का समर्थन करने से भारत की जनता देश को स्वतः कांग्रेस मुक्त कर देगी।

अभी विगत 23 मार्च की पूर्व संध्या पर जब पूरा देश भगत सिंह सहित अन्य शहीदों को उनकी शहादत पर याद कर रहा था ठीक उसी समय कांग्रेस पार्टी ने अपने अधिकृत ट्विटर एकाउंट पर महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को सबसे बड़ा ग़द्दार घोषित कर दिया हैं। इससे कांग्रेस की अब तक की सबसे विकृत मानसिकता का परिचय मिलता है तथा यह भी पता चल रहा है कि अब शहीदों के नाम पर सस्ती सियासत होने लग गयी है। अभी तक वीर सावरकर पूर्व प्रधानमंत्री दंदिरा गांधी के लिए महान स्वतंत्रता सेनानी थे, वहीं अब सोनिया गांधी की नजर में वे ग़द्दार हो गये हैं। कल को क्या पता सोनियागांधी के लिए श्रीमती इंदिरा गांधी देश की ग़द्दार नजर आने लग जायें तो अाश्चर्य नहीं होगा।

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर को गद्दार घोषित करने और भगत सिंह की तुलना कन्हैया कुमार से करने से कांग्रेसियों की बुनियादी सोच में एक बहुत बड़ा परिवर्तन दिखलायी पड़ रहा है। पीएम मोदी का विरोध करते-करते जब कांग्रेस को कुछ सूझ नहीं रहा तब वह शहीदों के नाम पर सस्ती सियासत करने पर उतर आयी है। अभी तक वीर सावरकर कांग्रेस के लिए अछूत नहीं थे लेकिन अब हो गये है।

1960 में सावरकर कांग्रेस के लिए महान देशभक्त थे। वीर सावरकर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरागांधी के लिए महान देशभक्त व स्वंतत्रता सेनानी थे और उनकी सरकार ने वीर सावरकर पर डाक टिकट जारी किया था। आज संसद भवन परिसर में वीर सावरकर की जो प्रतिमा लगी है वह भी कांग्रेसी सरकारों की ही देन है। संसद में जिन नेताओं की प्रतिमा लगायी जाती है उस समय कमेटी के अध्यक्ष वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ही थे और उनकी सहमति से ही सावरकार का चित्र लगाया जा सका । कांग्रेस पार्टी में आज हालात इस प्रकार हो गये हैं कि यह अपनी अमूल्य विरासत स्व. इंदिरा गांधी और नेहरूजी को ही अपमानित कर डाले तों अतिशयोक्ति नहीं होगी।

पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने वीर सावरकर के बारे में लिखा कि यह व्यक्ति बहुत ही मजबूत है। यहां पर अब यह प्रश्न भी उठ रहा है कि जब इंदिरा गांधी और नेहरू जी जैसे पूर्वज नेताओं को वीर सावरकर की देशभक्ति पर संदेह नहीं था उस समय कांग्रेस ने अपने ही पूर्वजों की सोच को दरकिनार करके वीर सावरकर जैसे नेता को भी गद्दार कैसे घोषित कर दिया? इससे साफ पता चल रहा है कि अब कांग्रेस के विचारों में भी तेजी से परिवर्तन हो रहा है। पता नहीं सोनिया-राहुल के कौन से सलाहकार रणनीति और बयानबाजी करवाकर कांग्रेस की फजीहत करवा रहे है।

कांग्रेस पार्टी अब गद्दार, देशद्रोही, देशभक्ति तथा भारत माता की जय बोलने के नाम पर दिवालिया होती जा रही है। वीर सावरकर और भगत सिंह जैसे नेताओं व शहीदों के बल पर ही आज भारत की जनता खुली हवा में जी पा रही है। आज कन्हैया कुमार जैसे देशद्रोहियों के मुंह से जो आवाज निकल रही है वह ऐसे क्रांतिकारियों की शहादत का ही परिणाम है। आज समय आ गया है कि जो लोग भगत सिंह की तुलना कन्हैया कुमार जैसे गद्दार के साथ करते हैं तथा जिनको भारत माता की जय बोलने में शर्म आ रही है उन सभी का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाये।

वीर सावरकर एक महान नेता थे। वह अखंड भारत का सपना देख रहे थे। भारत का स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास वीर सावरकर ने ही लिखा था। कांग्रेस ने जिस प्रकार से 23 मार्च को वीर सावरकर का अपमान किया वह किसी के गले नहीं उतर रहा है और नहीं उसके पीछे का कारण समझ में आ रहा है। यह बात अलग है कि जब संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने काफी भद्दे तरीके से वीर सावरकर का मुद्दा उठाकर भाजपा को घेरने का असफल प्रयास किया था।

आज की कांग्रेस पूरी तरह से बौद्धिक रूप से दिवालिया हो चुकी है इस कांग्रेस का कोई मान नहीं रह गया है। यह वोटों के चक्कर में इतनी अधिक विकृत हो चुकी है कि हर राष्ट्रीय भावना व स्मारक पर वामपंथी नजरिये से अपमानित कर रही है। कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि भारत कभी विश्वगुरू बन सके। कांग्रेस की मंशा पूरे भारत को खंड-खंड करने की थी वह तो गनीमत थी कि उस समय सरदार पटेल जैसा नेता मंत्रिपरिषद में मौजूद था।

— मृत्युंजय दीक्षित