गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तरानों में मुहब्बत का तराना ले के आया हूँ, मैं अपने साथ वो गुज़रा ज़माना ले के आया हूँ सूखे फूल, इक चूड़ी, वो प्यारे से खिलौने कुछ, मैं गठरी बाँध कर सारा खज़ाना ले के आया हूँ जहाँ की रेत पर लिखता था मैं हर रोज़ तेरा नाम, तू मुड़ के देख दरिया का […]

गीत/नवगीत

गीत : तुम गये तो मेरी प्यास गई

तुम गए तो जैसे प्राण गए, मेरे जीवन की आस गई तर्षित थी मैं जन्मों से, तुम गए तो मेरी प्यास गई जीवित तो…. अब भी हूँ मैं मैं हर्षित…. भी रह लेती हूँ तुम बिन चिंतन शून्य है पर मैं कल्पित भी रह लेती हूँ जीनेकी चाह थी मेरी भी, तुम गए तो मेरी […]

कविता पद्य साहित्य

भारत माता की जय बोलो

भारत माता की जय बोलो मन की अपनी गांठे खोलो.भारत माता की जय बोलो जब जब हमने उसे पुकारा, माँ के जैसा दिया सहारा हम सब उसके बालक जैसे धर्म तराजू में मत तोलो. भारत माता की जय बोलो हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई आपस में सब भाई भाई माता सबको आश्रय देती खाना देती मुख […]

कविता

पगड़ी की शान

पगड़ी आदमी के पहनावे की शान है, पगड़ी सच में महानता की पहचान है, एक दिन पगड़ी का दिमाग- सातवें आसमान पर था, उसे अपने शीर्षर्स्थ होने का अभिमान था, बाकी सब पहनावा उसके लिए तुच्छ था, आदमी की शान के लिए – जैसे वही सब कुछ था, उसने जूते को ‘पांव की जूती’ कह […]

कविता

“दोहा मुक्तक”

“दोहा मुक्तक” आँसू सूखे नभ गगन, धरती है बेचैन कब ले आएगा पवन, मेरी रातें चैन खिलूंगी मैं पोर पोर, डाली मेरे बौर छम-छम गाऊँगी सखी, लहरी कोयल बैन॥ महातम मिश्र (गौतम)

गीत/नवगीत

मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ,……………कलियुग से मैं हारी हूँ कौन समझता अब मुझको, किस पद की अधिकारी हूँ बनी पिता की मुश्किल मैं अब, जग समझे बेचारी हूँ हुई पुत्र की मैं मजबूरी,…………….पुत्री की लाचारी हूँ हूँ मैं ही झांसी की रानी,………….मैं ही यशोदा माई हूँ सरस्वती मैं सुर की देवी, …………मैं ही तीजन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ऐसे ही ना सबसे यारी किया करो, थोड़ी सी तो पर्देदारी किया करो इश्क हुआ तो नींद कहां से आएगी, अब रातों को पहरेदारी किया करो दुनिया वाले कुछ ना कुछ तो बोलेंगे, पर तुम मत अपना जी भारी किया करो बारिश में कच्चे घर की छत टपकेगी, पहले से भी कुछ तैयारी किया करो […]

गीतिका/ग़ज़ल

मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं,

मैंने भी कुछ टूटे से घर देखे हैं, उड़ने वालो के कतरे पर देखे हैं.|| डस जाते हैं वो धीरे धीरे यारो, आस्तीन में रहते विषधर देखे हैं.|| सारी दुनिया को तो धमकाते हैं वो उनके मन में पर हमने डर देखे है|| महलों में रहते थे शानों शौकत से आज वही सड़कों पर बेघर […]

कविता

“कर प्रण सपथ”

“कर प्रण सपथ” कर प्रण कर प्रण कर प्रण करप्रण सपथ हर बेटा माँ भारती का चलता उसके पथ वह मुंह कैसे बोलेगा जो बना हुआ है घून बंटा हुआ विचार लिए खींचता गैर का रथ॥ बेचा जिसने नारोंको विचारोको त्योहारोंको चले भंजाने मूर्ख वही माँ के जयकारों को कहते हैं लिखा नहीं भारत के […]

बाल कविता

हम हैं विद्यालय के बच्चे

हम हैं विद्यालय के बच्चे नन्हे मुन्हे छोटे बच्चे रखते सपने दिल में सच्चे करते हरदम बाते अच्छे। खेल-कूद में समय बिताते उछल-कूद कर राह चलते दिल में रखते सपने अच्छे कभी पढने से पीछे नहीं हटते। देश की अमूल्य निधि कहलाते हर कार्य को अच्छे से करते नहीं डर अभी हमें किसी का गृह कार्य […]