Monthly Archives: March 2016

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तरानों में मुहब्बत का तराना ले के आया हूँ, मैं अपने साथ वो गुज़रा ज़माना ले के आया हूँ सूखे फूल, इक चूड़ी, वो प्यारे से खिलौने कुछ, मैं गठरी बाँध कर सारा खज़ाना ले के...



  • पगड़ी की शान

    पगड़ी की शान

    पगड़ी आदमी के पहनावे की शान है, पगड़ी सच में महानता की पहचान है, एक दिन पगड़ी का दिमाग- सातवें आसमान पर था, उसे अपने शीर्षर्स्थ होने का अभिमान था, बाकी सब पहनावा उसके लिए तुच्छ...

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक” आँसू सूखे नभ गगन, धरती है बेचैन कब ले आएगा पवन, मेरी रातें चैन खिलूंगी मैं पोर पोर, डाली मेरे बौर छम-छम गाऊँगी सखी, लहरी कोयल बैन॥ महातम मिश्र (गौतम)

  • मैं नारी हूँ

    मैं नारी हूँ

    मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ,……………कलियुग से मैं हारी हूँ कौन समझता अब मुझको, किस पद की अधिकारी हूँ बनी पिता की मुश्किल मैं अब, जग समझे बेचारी हूँ हुई पुत्र की मैं मजबूरी,…………….पुत्री की लाचारी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ऐसे ही ना सबसे यारी किया करो, थोड़ी सी तो पर्देदारी किया करो इश्क हुआ तो नींद कहां से आएगी, अब रातों को पहरेदारी किया करो दुनिया वाले कुछ ना कुछ तो बोलेंगे, पर तुम मत...


  • “कर प्रण सपथ”

    “कर प्रण सपथ”

    “कर प्रण सपथ” कर प्रण कर प्रण कर प्रण करप्रण सपथ हर बेटा माँ भारती का चलता उसके पथ वह मुंह कैसे बोलेगा जो बना हुआ है घून बंटा हुआ विचार लिए खींचता गैर का रथ॥...