Monthly Archives: April 2016


  • “ग़ज़ल”

    “ग़ज़ल”

    212 212 212 212 तर्ज- हाल क्या है दिलों का न पूछो सनम तुम न आते न मौसम बदलता सनम दूर बादल कहीं रुक बरसता सनम आह भरती रही ये बिजुरया चमक श्वांस मेरे न बादल...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बात दिल की जहाँ-जहाँ रखिए एक परदा भी दरम्याँ रखिए घोंसले जब बुने हैं काँटों से क्यों बचाकर हथेलियाँ रखिए हौसले अपने आज़माने को हर कदम साथ आँधियाँ रखिए मौसमों से नज़र मिलाने को सर पे...



  • धन्य तुम्हारे भाग

    धन्य तुम्हारे भाग

    अकबर बीरबल का किस्सा, सुनो ध्यान चित्त लाय, अकबर पूछे प्रश्न कई, बीरबल दियो बताय. अकबर ने पूछा, ”कहो, कितने कौवे देश?” बीरबल बोला, ”जी हुजूर, गिनकर कहूं संदेश.” एक लाख हज़ार दस, पांच गिने महाराज,...

  • बच्चों की फुलवारी

    बच्चों की फुलवारी

    फुलवारी मैं फुलवारी, बच्चों की मैं फुलवारी, इन्हें देख मैं खुश हो जाती, भाए इनकी किलकारी. जैसे सुमन मुझे हैं प्यारे, बच्चे भी मुझको प्यारे, इनके बिना मैं सूनी लगती, रात में ज्यों नभ बिन तारे....

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    चिंतन यू होता नहीं, बिन चिंता की आह बैठ शिला पर सोचती, कितनी आहत राह निर्झरणी बस में नहीं, कमल पुष्प अकुलाय कोलाहल से दूर हो, ढूढ़ रही चित थाह॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    यूँ तो साथी बहुत हैं लेकिन साथी सबसे प्यारा दर्द सब अपने-अपने दर्द में उलझे समझे कौन हमारा दर्द दर्द नाखुदा, दर्द ही कश्ती, खुद ही दर्द मुसाफिर है दर्द का दरिया, दर्द की मौजें, तूफां...