समाचार

जिस मनुष्य में मानवता जग जाती है वह महापुरुष बन जाता हैः आचार्य पीयूष

ओ३म् आर्यसमाज का 37 वां वार्षिकोत्सव आज 30 अप्रैल, 2016 को हमें आर्यसमाज, नत्थनपुर, देहरादून के 37 सवें वार्षिकोत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिला। हमारे वहां पहुंचने पर हरिद्वार के आर्य भजनोपदेशक श्री धर्मसिंह सहमल के भजन हो रहे थे। उनके भजन के कुछ शब्द थे कि बच्चों को समझो अपनी आखों के तारे, […]

गीतिका/ग़ज़ल

“ग़ज़ल”

212 212 212 212 तर्ज- हाल क्या है दिलों का न पूछो सनम तुम न आते न मौसम बदलता सनम दूर बादल कहीं रुक बरसता सनम आह भरती रही ये बिजुरया चमक श्वांस मेरे न बादल गरजता सनम।। तुमहि मेरे सबर के हो अभिराम जी पास आओ जरा गम सुलगता सनम।। देख लो बह चली […]

कविता

कॉर्डों की महारानी- मनजीत

कोई है किसी के मन की रानी, कोई है किसी के महलों की रानी, कोई है किसी के अधरों की रानी, आप हैं मनजीत जी, कॉर्डों की महारानी. रोज़ सुबह गुड मॉर्निंग के जितने कॉर्ड मिलते हैं, भेजती हो, एक-से-एक चमकदार जितने कॉर्ड मिलते हैं, भेजती हो, कभी नील परी, कभी गुलाबी परी के जितने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बात दिल की जहाँ-जहाँ रखिए एक परदा भी दरम्याँ रखिए घोंसले जब बुने हैं काँटों से क्यों बचाकर हथेलियाँ रखिए हौसले अपने आज़माने को हर कदम साथ आँधियाँ रखिए मौसमों से नज़र मिलाने को सर पे कोई न आसमाँ रखिए हर जगह नाम उनका लिक्खा है फिक्र है दासतां कहाँ रखिए माया-ए-ग़म छुपाएँ किस-किस से […]

इतिहास

पं. लोकनाथ तर्कवाचस्पति की ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज भक्ति

ओ३म् आर्यसमाज के भूले बिसरे विद्वान आर्यसमाज की दूसरी पीढ़ी के प्रचारकों में अद्वितीय शास्त्रार्थ महारथी, तर्कपटु तथा वाग्मी पं. लोकनाथ तर्कवाचस्पति का नाम  अन्यतम है। आर्यसमाज की 10 अप्रैल, सन् 1875 को स्थापना के कुछ वर्ष बाद आपका जन्म कोट अद्दे जिला मुजफ्फरगढ़ (पाकिस्तान) में हुआ था। आपका अध्ययन मुलतान (पाकिस्तान) तथा उसके बाद […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म लेख

इन्सान ईश्वर क्यों पूजता है ?

  भूल जाते है इन्सान कि मृत्यु अटल है हर कोई यहाँ मृत्यु की पंक्ति में खड़ा है क्रमागत मृत्योंमुखी है किन्तु इतना धीरे आभास नहीं होता ,यही तो आश्चर्य है | हाँ ,इंसान को पता नहीं लगता कि कब वह मृत्यु के द्वार पहुँच गया |जिंदगी मौज मस्ती में बिता देता है ,दूसरों को […]

शिशुगीत

धन्य तुम्हारे भाग

अकबर बीरबल का किस्सा, सुनो ध्यान चित्त लाय, अकबर पूछे प्रश्न कई, बीरबल दियो बताय. अकबर ने पूछा, ”कहो, कितने कौवे देश?” बीरबल बोला, ”जी हुजूर, गिनकर कहूं संदेश.” एक लाख हज़ार दस, पांच गिने महाराज, अकबर बोले गलत तो? गए काम से आज. बीरबल बोला, ”गलत तो, हो न सकें महाराज, गिनती बढ़े तो […]

शिशुगीत

बच्चों की फुलवारी

फुलवारी मैं फुलवारी, बच्चों की मैं फुलवारी, इन्हें देख मैं खुश हो जाती, भाए इनकी किलकारी. जैसे सुमन मुझे हैं प्यारे, बच्चे भी मुझको प्यारे, इनके बिना मैं सूनी लगती, रात में ज्यों नभ बिन तारे. आओ मेरी गोद में खेलो, सुमन तोड़ मत छितराना, अच्छा नहीं मसलना इनको, और मसलकर बिखराना. यह जीवन है […]

कविता

“दोहा मुक्तक”

चिंतन यू होता नहीं, बिन चिंता की आह बैठ शिला पर सोचती, कितनी आहत राह निर्झरणी बस में नहीं, कमल पुष्प अकुलाय कोलाहल से दूर हो, ढूढ़ रही चित थाह॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

यूँ तो साथी बहुत हैं लेकिन साथी सबसे प्यारा दर्द सब अपने-अपने दर्द में उलझे समझे कौन हमारा दर्द दर्द नाखुदा, दर्द ही कश्ती, खुद ही दर्द मुसाफिर है दर्द का दरिया, दर्द की मौजें, तूफां और किनारा दर्द मंहगा बहुत पड़ा हमको ये सौदा तेरी मुहब्बत का थोड़ी सी खुशियां चाहीं थीं मिल गया […]