धन्य तुम्हारे भाग

अकबर बीरबल का किस्सा, सुनो ध्यान चित्त लाय,
अकबर पूछे प्रश्न कई, बीरबल दियो बताय.
अकबर ने पूछा, ”कहो, कितने कौवे देश?”
बीरबल बोला, ”जी हुजूर, गिनकर कहूं संदेश.”
एक लाख हज़ार दस, पांच गिने महाराज,
अकबर बोले गलत तो? गए काम से आज.
बीरबल बोला, ”गलत तो, हो न सकें महाराज,
गिनती बढ़े तो मित्र हैं, घूमने आए आज.
गिनती घटी तो घूमने, गए हमारे काग,
अकबर-दरबारी हंसे, ”धन्य तुम्हारे भाग.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।