Monthly Archives: April 2016

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      रस्मे उल्फ़त है इसे प्यार न समझा जाए । मेरे इनकार को इकरार न समझा जाए । आँख से आँख मिलाई, है खता उनकी भी सिर्फ मुझको ही गुनहगार न समझा जाए । चन्द सिक्कों...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      उँगलियाँ सब पे वो उठाता है अपनी कमियां मगर छुपाता है । मुश्किलों में भी हौसला रखिये फूल कांटों में मुस्कुराता है । कद्र इंसान की नहीं होती रोज पत्थर को पूजा जाता है ।...

  • कहानी : तृप्ति

    कहानी : तृप्ति

    कितनी गहमागहमी है हर तरफ़। हर कोई अपनी ही धुन में, किसी भी दिशा में भागता हुआ सा। स्टोव की लाल लपटों के ऊपर रखे बर्तन मे, उबलती चाय की भाप, इस सर्दी के मौसम में...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    “कुंडलिया” चला लक्ष्य नभ तीर है, अर्जुन का अंदाज समझ गया है सारथी, देखा वीर मिजाज देखा वीर मिजाज, दिशाएं रथ की मोड़ी लिए सत्य आवाज, द्रोपदी बेवस दौड़ी कह गौतम कविराय, काहि महाभारत भला घर...

  • डाॅ. आंबेडकर : एक विचार

    डाॅ. आंबेडकर : एक विचार

    ‘‘मैं केवल भारतीय रहूँगा। मेरी पहचान केवल एक भारतीय के रूप में होनी चाहिए। ….बस मंै इसी बात के लिये मर जाना चाहता हूँ। मैंने देख लिया है कि जब तक हम अपने को हिंदु, मुसलमान,...

  • गीत

    गीत

    अगर आसान होता, तो शायद कर भी देते, इक दूसरे को, हम रब के हवाले, मगर तुमको पता है, कि ये मुमकिन नहीं है, तू ही दुनिया है मेरी, कुछ तेरे बिन नहीं है, तुमसे ही...



  • गीत : क्यों पूज्य नारी हो

    गीत : क्यों पूज्य नारी हो

    इससे बड़ी नहीं कोई संतुष्टि अभिमान की नारी रहे बन्धनीय, मात्र अबला बेचारी हो चरित्र का प्रमाण जब राम ही ने मांग लिया कलयुग में मनुओं को, क्योँ पूज्य नारी हो स्वयं जिसने जना है सारे...

  • चार पल

    चार पल

    चार पल कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ.. इस आस में बीती उम्र कोई हमे अपना कहे . अब आज के इस दौर में...