धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मातृ देवो भव

माता की महिमा वेद, स्मृति, पुराण, इतिहास व अन्य ग्रन्थों में वर्णित है। शतपथ ब्राह्मण में माता, पिता और आचार्य के विषय में कहा गया है- ‘मातृमान् पितृमाना चार्यवान्’ तथा छान्दोग्य उपनिषद् में ‘आचार्यवान् पुरुषो वेद’ कहा गया है। इस प्रकार किसी के व्यक्तित्व के निर्माण में इन तीनों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है परन्तु माता का स्थान सर्वोपरि माना गया है। मनुस्मृति के अनुसार एक आचार्य गौरव में दस उपाध्यायों (वेद के पढ़ाने वाले) से बढ़कर है। एक पिता सौ आचार्यों से श्रेष्ठतर है और एक माता हजार पिताओं से श्रेष्ठतर है। मातृमान् का अर्थ माता वाला होता है, परन्तु व्याकरणीय दृष्टि से, इसका अर्थ वह व्यक्ति है, जिसकी माता प्रशंसायुक्त धार्मिक और विदुषी हो। ऐसी माता ही अपनी संतान में इच्छित गुणों का विकास कर सकती है। अधिक उपकारी वस्तुओं या व्यक्तित्वों को हम माता का स्वरूप समझते हैं। वेद से ज्ञान का भण्डार मिलने से इसे वेदमाता, धरती से रस, ओषधि आदि मिलने से, इसे धरती माता, और गाय से, अमृत तुल्य दुग्ध मिलने से इसे गाय माता कहते हैं।

माता का स्नेह अपनी सन्तान पर उसके जन्म से लेकर प्रौढ़ावस्था तक बना रहता हे। वह न केवल अपने संस्कार उसे देती है, अपितु उसे समस्त गुणों और विद्या से युक्त भी करती है। कहा गया है- ‘पुत्र कुपुत्र भवति माता कुमाता न भवेत्’ । संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनके व्यक्तित्व के निर्माण में माता की भूमिका अवश्य रही है। कौशल्या राम को सदैव धर्माचरण की शिक्षा देती थी। उन्होंने दुःखी मन होते हुए भी, राम को धर्म का विचार करते हुए वन जाने की आज्ञा दी थी। नारी चाहे पत्नी या माता के रूप में हो, वह मानव निर्माण की मूल धुरी है। प्रकृति स्वरूपा नारी को परमेश्वर ने सृजन की शक्ति प्रदान की है। वह प्रेम, दया, धैर्य और ममता की देवी है। इसीलिए कहा गया है- ‘मातृ देवो भव’ अर्थात् माँ को देवता समझकर उसकी सेवा करनी चाहिए। शालीनता, सज्जनता, सहृदयता आदि सद्गुण सन्तान में परिवार से ही विकसित होते हैं, जिनकी प्रथम शिक्षिका मां होती है। मां द्वारा दी गई शिक्षा के आधार पर ही हमारे जीवन व चरित्र का निर्माण होता है, इसीलिए कहा गया है- ‘माता निर्माता भवति’। मातृ दिवस पर सभी माताओं को हम नमन करते हैं। हमारे देश में तो प्रत्येक दिवस मातृ-पितृ दिवस है, इसलिए माता के उपकार को कभी न भूलें और मां की सेवा में सदा तत्पर रहें, यही सबके लिए हमारी कामना है।।

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