आकस्मिक छापे में अधिकाँश के जेब में बोतलें निकली : गजब भयो रामा, जुलम भयो रे

सपना सुबह साढ़े चार बजे का था, मां कहती थी, जागने से ठीक पहले का सपना जल्दी ही सच होता है I पता नहीं कौनसा देश था, (भारत तो नहीं था) परन्तु वहां की सरकार ने एक अप्रत्याशित निर्णय लिया I जिसके तहत एक बेहद उच्च शक्तिसम्पन्न विभाग (हाई पॉवर डिपार्टमेंट) बनाया गया था I देशभर के ऐसे अनेक अधिकारियों को इसके अन्तर्गत हर शहर – हर तहसील में पदस्थ किया गया, जो निहायत ईमानदार थे I छापामारी की दृष्टि से इसमें पुलिस तथा सी.बी.आई. के अधिकारी भी शामिल किए गए थे I विभाग का नाम था, वर्क कल्चर डेवलपमेंट डि पा र्टमेंट I

यइस राष्ट्रव्यापी विभाग के उद्देश्य बेहद स्पष्ट और साफ़ थे I देशभर के सभी सरकारी ऑफिसों में कर्म संस्कृति को विकसित करना और ईमानदार अधिकारियों को काम करने के लिए सुअवसर प्रदान करना और नवाचार के लिए उन्हें संसाधन उपलब्ध कराना, काम टालने वालों को चेतावनी देकर जनता की सेवा के लिए जी जान से लगाना तथा जन्मजात कामचोरों को नौकरी से निकालना था I ताकि जनता को सरकारी सेवकों की कामटालू प्रवृत्ति, महंगाई, भ्रष्टाचार, मिलावट, जमाखोरी, कालाबाजारी, खराब और घटिया निर्माणों आदि से मुक्ति मिल सकें।

सरकार का कहना था कि आइन्दा से सरकारी सेवकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट उनके उच्चाधिकारी नहीं, बल्कि जिनकी सेवा के लिए उन्हें तैनात किया गया है, उनसे चर्चा कर तैयार की जाएगी I मसलन, टीचर्स की स्टूडेंट्स, डॉक्टरों, नर्सों, कम्पाउंडरों आदि की रोगी और उनके साथी, एग्रीकल्चर विभाग के अधिकारियों की किसान, सेल्स टैक्स विभाग के अधिकारियों की व्यापारी आदि अनादि।

आम जनता की एक शिकायत के चलते एक विभाग में छापा मारा गया I तीन सौ लोगों के इस विभाग में 25-30 उच्चाधिकारी थे, और दसेक प्रतिशत को छोड़कर सब के सब अपने अपने विभाग प्रमुख के चमचे या जी हजूरिए थे, कुछ ऐसे भी थे, जिनसे विभाग प्रमुख डरते थे, और कुछ इस मानसिकता वाले थे कि वेतन जिन्दाबाद बाकी हमें क्या करना I छापे में उच्चाधिकारियों और उनके चमचों की जेबों और विभागीय अलमारियों में संदिग्ध द्रव पदार्थ की छोटी – बड़ी बोतलें निकली I सभी ने अनभिज्ञता व्यक्त करते हुए बोतलें अपनी नहीं होने का दावा किया I उनका कहना था कि ये हरकतें धोबी और प्यून की हैं I जांच में धोबी और प्यून निर्दोष साबित हुए I गहन जांच के बाद पता चला कि उन सभी बोतलों में एक विशेष प्रकार का द्रव था, जो तेजी से फैलकर किसी भी ऐसी अच्छी योजना की भ्रूणहत्या करने में सक्षम था, जिसके लागू होने पर आम जनता को राहत मिलती हो I यह भी पता चला कि इस विशेष द्रव का नाम रायता है।

नार्को टेस्ट के प्रभाव में सभी ने मुंह खोलते हुए बोला कि यदि हम रोज रोज आम जनता के हित में या जिस काम के लिए हमें तैनात किया गया है, वह करने लगे तो जनता की हमसे अपेक्षा बढ़ जाएगी, जिसके कारण हमें रोज जनता की सेवा करना पड़ेगी, जबकि हम सप्ताह में एकाध बार जनता पर अहसान जताते हुए काम करते हैं I जब पूछा गया कि विभाग में जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस (शो कॉज नोटिस) क्यों दिए गए ? नार्को के प्रभाव में उन्होंने सत्य उगला कि इनके कारण विभाग के सभी लोगों से आम जनता वैसी ही अपेक्षा करने लगती है, इसलिए उन्हें इतना हैरान परेशान किया जाना जरूरी है कि वे काम करना बन्द कर दें और हमारा नाकारापन छूपा रहे I उच्चाधिकारियों से भी ऐसे ईमानदार सेवकों की बार बार शिकायत की जाती है ताकि इनके खिलाफ कोई ड्रास्टिक एक्शन हो जाए और उनसे मुक्ति मिलें I

ऐसा सपना किसी फेसबुक साथी ने भारत के लिए देखा हो तो शेयर कीजिएगा, देश का भला होगा।

— डॉ मनोहर भंडारी