गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं,
न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं

लगेगी आग तो घर सबके जल जाएँगे मालूम है,
घास के ढेर को फिर भी वो चिंगारी दिखाते हैं

सगा भाई भी हो मुफलिस तो आँखें फेर लेते हैं,
अमीरों से मगर जबरन रिश्तेदारी दिखाते हैं

जलसे में सियासत के मुझे लाए वो ये कह कर,
तुम्हें सबसे बड़ी दुनिया की बीमारी दिखाते हैं

निगाह में डाल के काजल करो तुम तेज दोधारी,
फिर हम भी कत्ल होने की तैयारी दिखाते हैं

— भरत मल्होत्रा

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