गीत/नवगीत

गीत : दामन मेरा खुशियों से भर-भर जाए

फिर क्यों ना दामन मेरा
खुशियों से भर-भर जाए
तेरी करूणा के बादल बरसे
मैंने जब-जब हाथ फैलाए

सुख के समय तो मैंने कभी ना
इक पल तुमको याद किया
अपने झूठे अहंकार में
जीवन ये बर्बाद किया
लेकिन तुम ही बने सहारा
जब आँख में आँसू आए

तेरी करूणा के बादल बरसे
मैंने जब-जब हाथ फैलाए

मेरी योग्यता से ज्यादा ही
तूने दिया है मुझको
एक बार भी धन्यवाद पर
मैंने कहा ना तुझको
फिर भी मेरी राह में तूने
पग-पग फूल बिछाए

तेरी करूणा के बादल बरसे
मैंने जब-जब हाथ फैलाए

मिटना है, मिट जाएगा
मिट्टी का मन, मिट्टी का तन
तेरी कृपा से ही टूटेंगे
जन्मों-जन्मों के बंधन
साथ चलेंगे बस वो ही
कुछ पुण्य जो मैंने कमाए

तेरी करूणा के बादल बरसे
मैंने जब-जब हाथ फैलाए

— भरत मल्होत्रा

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