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आईना बोलता है

………… प्रभु सहारे रेल का सफर………..

‘रेल हमसफर सप्ताह’ प्रभु द्वारा प्रदत्त असीम रेल अनुकंपाओं को उजागर करने के उद्देश्य से, उन्ही के आह्वान पर रेल विभाग द्वारा मनाया जा रहा है। सराहनीय सुधारों पर जन प्रतिक्रिया भी आमंत्रित की जा रहा है।

इस कड़ी में, रेल द्वारा दी जा रही सुविधाओं को इंगित करते हुए एक व्यक्ति ने सुविधाओं की प्रशंसा में बंगलुरु स्टेशन का एक वीडियो रेल मंत्रालय को भेजा है जिसमें एक ‘लाल बत्ती’ कार को प्लेटफार्म पर गाडी तक जाते हुए दिखाया गया है। संभवतः लाल बत्ती सवार शारीरिक नहीं तो मानसिक रूप से अवश्य विकलांग था। गाड़ी पर सवार होने की इस सुविधा को जनता द्वारा अत्यंत सराहनीय माना जा रहा है।

हमारे मोहल्ले के कल्लू भाई, जो स्टेशन के निकट एक साइकिल स्टैन्ड चलाते हैं, बहुत उत्साहित हैं कि अब वे अपना स्टैन्ड प्लेटफार्म पर ही लगा लेंगे। जनता वहीं से डिब्बों में सवार हो जाएगी और लौट कर वहीं से अपनी गाड़ी उठा लेगी। साइकिल स्टैन्ड से रेलवे स्टेशन तक की दूरी ही समाप्त। आखिर, सुविधाओं को और बेहतर करने में उनका भी तो योगदान होना चाहिये !

मनोज पाण्डेय 'होश'

फैजाबाद में जन्मे । पढ़ाई आदि के लिये कानपुर तक दौड़ लगायी। एक 'ऐं वैं' की डिग्री अर्थ शास्त्र में और एक बचकानी डिग्री विधि में बमुश्किल हासिल की। पहले रक्षा मंत्रालय और फिर पंजाब नैशनल बैंक में अपने उच्चाधिकारियों को दुःखी करने के बाद 'साठा तो पाठा' की कहावत चरितार्थ करते हुए जब जरा चाकरी का सलीका आया तो निकाल बाहर कर दिये गये, अर्थात सेवा से बइज़्ज़त बरी कर दिये गये। अभिव्यक्ति के नित नये प्रयोग करना अपना शौक है जिसके चलते 'अंट-शंट' लेखन में महारत प्राप्त कर सका हूँ।