गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

‌दोस्ती तुम निभा नही सकते । आग दिल की बुझा नहीं सकते ।। बेवफा लोग हैं मेरी किस्मत । दर्दे मंजर दिखा नही सकते ।। ‌ मेरी इज्जत उछाल कर तुम भी । जश्न कोई मना नहीं सकते ।। ‌ ‌जख़्म देकर न पूछ दर्द मेरा । आसुओं को मिटा नहीं सकते ।। ‌ दिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं, न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं लगेगी आग तो घर सबके जल जाएँगे मालूम है, घास के ढेर को फिर भी वो चिंगारी दिखाते हैं सगा भाई भी हो मुफलिस तो आँखें फेर लेते हैं, अमीरों से मगर जबरन रिश्तेदारी दिखाते हैं जलसे […]

कविता

रिश्ते

दुनियां में कुछ रिश्तें ऐसे भी होते हैं अनजाने में ही जाने कब कैसे जुड़ जाते हैं बिना शर्त किसी और बिना स्वार्थ के उम्रभर के लिए मन मे कही बस जाते हैं ं कुछ ऐसे बंधन भी होते हैं जग में जिनमें बंध कर ही सुख मिलता है ं उनसे ही निखरतें हैं खुशियों […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वर ने मुझे मनुष्य क्यों बनाया?

ओ३म्   मैं मनुष्य हूं और मुझे मनुष्य व पुरुष जाति में यह जन्म मेरे माता-पिता से प्राप्त हुआ है। मेरे जन्म को लगभग 64 वर्ष हो गये परन्तु आज पहली बार मेरे मन में यह प्रश्न उठा कि इस बात पर भी विचार करूं कि ईश्वर ने मुझे मनुष्य और वह भी पुरुष योनि […]

कहानी

सब उपाधियों से ऊपर

गिरधारीलाल को अपने छात्र-जीवन में एक प्रतिभाशाली छात्र माना जाता था. उसकी ईमानदारी, इंसानियत, साहस और दूसरों की सहायता की सभी जगह सराहना की जाती थी. रोज़ मंदिर में जाने वाले उसके पिताजी बनवारीलाल भी अपने लाल के इन सद्गुणों की सराहना करते नहीं थकते थे. उनकी नज़र में बस अपने सुपुत्र की एक ही […]

कविता

अनबूझ पहेली

मैं अनबूझ पहेली हूँ खुद की ही सहेली हूँ होते हैं सभी संग मेरे लाखों में भी अकेली हूँ तेरी यादों को बुनती हर लम्हे को चुनती नहीं तूने साथ दिया ये सोच के हू घुनती । जब तुझको बुलाती हूँ मैं खुद को भुलाती हूँ तू फिर सपनों में आएगा यू खुदको बहलाती हूँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ज़ुबान से तो ना लिया नाम तुम्हारा हमने, खामोशियों से मगर रोज़ पुकारा हमने लबों पे बात मेरे दिल की कभी आ ना सकी, आँखों से किया कई बार इशारा हमने जान जाती है कैसे जिस्म छोड़कर कोई, तुम जो रूठे तो देखा वो नज़ारा हमने हर वो शख्स खुश हुआ मेरी तबाही पर, जहाँ […]

हाइकु/सेदोका

पांच हाइकु

१-आधुनिकता नीलामी संबंधों की खुली दुकान। —— २-बुरा करम खुशहाल जीवन मन का भ्रम । —— ३-सुन्दर तन कनक घट विष मलिन मन । ——- ४-स्वारथ वश मुखौटा याराना का कटु सच्चाई । ——- ५-कविता पढ़ी कछु पल्ले न पड़ी जनता हंसी । डॉ रमा द्विवेदी ,हैदराबाद

कविता

कविता : एक ऑटो

एक आॅटो टूटा फूटा सा जो जोर से आवाज करता है ना कोई तेजी न कोई ताकत है रोज हजार सवारी आती हैं जो अपनी अपनी दिशा बताती हैं वो टूटा फूटा आॅटो बस कही हुई दिशाओं पर चलता जाता है चुपचाप हमारी जिन्दगी भी एक आॅटो की तरह है सब आते हैं कहते हैं […]

लघुकथा

लघुकथा — कंजिका

पुनिया परिवार लगभग साल भर पहले ही इस पाश कॉलोनी में रहने आया था। अपने पति देव के प्रमोशन की मन्नत पूरी होने होने की ख़ुशी में मिसेज़ पुनिया ने सारे नवरात्रे व्रत रखने संकल्प लिया था। चहुँ और नवरात्र की धूम मची हुई थी। अष्टमी के दिन कन्या जिमाने के लिए बच्चियां ढूँढे नहीं […]